फोर्स मोटर्स महाराष्ट्र में चला रही है मोबाइल डिस्पेंसरी, अब तक कर चुकी है 95,600 मरीजों का इलाज
देशभर में कोरोना वायरस के चलते स्वास्थ्य संसाधनों और अस्पतालों पर बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में कोरोना मरीजों का पता लगाने में फोर्स मोटर्स की पहल महाराष्ट्र के लिए काफी मददगार साबित हो रही है। भारतीय जैन संगठन के सहयोग से फोर्स मोटर्स महाराष्ट्र में 50 मोबाइल डिस्पेंसरी चला रही है जो कोरोना से संक्रमित लोगों का पता लगाने का काम कर रही है।

इन मोबाइल डिस्पेंसरी 1 अप्रैल 2020 से चलाया जा रहा है और अब तक राज्य में कुल 945 कोरोना संक्रमितों का पता लगाकर उन्हें अस्पताल रेफेर कर चुकी है। इन मोबाइल डिस्पेंसरी को पुणे और आस-पास के पिछड़े और अनुसूचित इलाकों में चलाया जा रहा है।

सभी डिस्पेंसरी में डॉक्टर के साथ सपोर्ट स्टाफ और दवाइयों की भी व्यवस्था की गई है। इन मोबाइल वैन में कोरोना वायरस के लक्षण को पहचानने के लिए सभी जरूरी उपकरण मौजूद हैं।

डॉक्टरों और मेडिक की टीम मरीजों की जांच कर उन्हें संबंधित अस्पतालों में रेफेर करते हैं। 50 मोबाइल वैन की टीम प्रतिदिन 2,500 लोगों की जांच कर सकती हैं साथ ही एक दिन में लगभग 500 रोगियों में कोरोना वायरस के लक्षण की जांच कर सकती हैं।

सर्दी और फ्लू की जांच कराने आने वाले वाले रोगियों का उचित उपचार कर डॉक्टर उन्हें कोरोनो वायरस के संक्रमण से बचने के उपाय भी बताते हैं। पिछले 24 दिनों में 95,600 से अधिक नागरिकों की जांच की जा चुकी है जिसमे 945 रोगियों में कोरोना के लक्षण पाए जाने पर उन्हें अस्पताल रेफेर किया गया है।

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के पूरी तरह खत्म होने तक इस सेवा को जारी रखा जाएगा। इस पहल पर बोलते हुए फोर्स मोटर्स के प्रबंध निदेशक, प्रसन फिरोदिया ने कहा, "देश में महाराष्ट्र कोरोना वायरस का एक हॉटस्पॉट बन गया है। जिससे डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों पर भारी दबाव बन रहा है।"

उन्होंने बताया कि उन्हें इस नेक पहल से जुड़े होने पर गर्व है। इस पहल के अलावा कंपनी ने अपने सीएसआर कोष से कोरोना राहत कार्य के लिए के लिए 25 करोड़ रुपये भी दान किए हैं।


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