फास्टैग लेन पर जाने वाले 18 लाख डिफॉल्टरों से हुई 20 करोड़ रुपये की वसूली
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाल ही में यह जानकारी दी है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर इलेक्ट्रॉनिक टोल प्लाजा में फास्टैग ना होने के बावजूद फास्टैग लेन में घुसने वालों से 20 करोड़ रुपये जुर्माना वसूला गया है।

बतातें चले कि अब तक ऐसे 18 लाख डिफॉल्टरों पर जुर्माना लगाया जा चुका है तथा उनसे 20 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। यह लोग वाहन में फास्टैग ना होने के बावजूद उस लेन में घुस आये थे।

इस इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रोग्राम को दिसंबर में लाये जाने के समय राजमार्ग मंत्रालय ने घोषणा कर दी थी कि बिना टैग के फास्टैग लेन में घुसने वालों पर दुगुना टोल लगाया जाएगा।

एनएचएआई ने अपने एक बयान में यह कहा कि वर्तमान फास्टैग यूजर को तरजीह देने तथा भविष्य में फास्टैग को बढ़ावा देने के लिए गलत लेन में आने वालों से दुगुना जुर्माना वसूला जा रहा है।

एनएचएआई ने बताया कि "फास्टैग लेन में जबरदस्ती घुसने वाले अब तक कुल 18 लाख लोगों से दुगुना कैश टोल चार्ज वसूला गया है जो कि कुल 20 करोड़ रूपये पहुंच चुका है।"

बतातें चले कि देश में 15 जनवरी से फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया था तथा फास्टैग व कैश दोनों के लिए अलग अलग लेन बनाये गए है। देश में अभी तक 1.55 करोड़ फास्टैग बांटे भी जा चुके है।

हाल ही में एनएचएआई ने यह जानकारी दी थी कि फास्टैग को बढ़ावा देने के लिए इसे 15 से 29 फरवरी तक मुफ्त में बांटा जा रहा है, जिसे निर्धारित जगहों से लिया जा सकता है। इस पर पहले 100 रुपये का चार्ज लगता था।


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