Transport Vehicle Speed Limit: ट्रांसपोर्ट वाहनों की गति सीमा राज्य सरकार तय नहीं करेंगी -हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2015 के बाद रजिस्टर किए गए ट्रांसपोर्ट वाहनों की श्रेणी के लिए राज्य सरकार की 2018 अधिसूचना को 40 किमी/घंटा की गति सीमा से नीचे कर दिया है। इस भ्रम को दूर करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने इसकी जानकारी दी है।

पीठ ने कहा कि राज्य सरकार वाहनों के लिए एक गति सीमा तय नहीं कर सकती है। बता दें कि ट्रांसपोर्ट वाहनों की गति सीमा संशोधित सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 2015 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत अलग-अलग है।

हाईकोर्ट पीठ ने इस बात साफ किया कि हल्के ट्रांसपोर्ट वाहनों की श्रेणी के लिए एमवी रूल्स में स्पष्ट किया गया है कि इनमें स्पीड गवर्नर होना चाहिए, जिसकी अधिकतम पूर्व निर्धारित गति 80 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए। यह गवर्नर वाहनों में निर्माण के दौरान ही लगाए जाने चाहिए।

इसके अलावा वाहनों में यह गवर्नर डीलरशिप पर भी लगाए जा सकते हैं। इसके बाद भी राज्य सरकार को इन वाहनों की अधिकतम गति 40 किमी/घंटा रखने के आदेश नहीं देने चाहिए। पीठ ने इस मामले में टिप्पणी की है।

बेंच ने गति सीमा पर सरकार के आदेश को अलग करते हुए कहा कि "01 अक्टूबर, 2015 के बाद पंजीकृत वाहनों के लिए स्पीड गवर्नर लगाने की आवश्यकता को नियम 118 (1) में निपटा दिया गया है, जो स्वयं आवश्यक विनिर्देशों को पूरा करता है और इसे राज्य सरकारों को निर्धारित करने की अनुमति नहीं देता है।"

आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी अधिसूचना की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। यहां विभिन्न श्रेणियों के परिवहन वाहनों के लिए विभिन्न गति सीमाओं पर स्पीड गवर्नर से लैस करने के प्रावधान किए गए थे।


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