Connected Tech In New Cars: 2020 ऑटो स्टोरीज: नई कारों में कनेक्टेड तकनीक, फायदे व नुकसान
पिछले कुछ समय से यह चर्चा में बना हुआ है, देश भर में कनेक्टेड कारों की मांग बढ़ गयी है। ऐसे में आज हम कारों के कनेक्टेड तकनीक की सभी जानकारी लेकर आये हैं और इसके फायदे व नुकसान के साथ जिन कारों में यह तकनीक उपलब्ध की जानकारी लेकर आये हैं।

क्या होता है कनेक्टेड कार?
कनेक्टेड कार ऐसे कार होते हैं जिनके भीतर ऐसे डिवाइस होते हैं जिनकी मदद से कार के भीतर उपलब्ध डिवाइस या कार के बाहर अन्य डिवाइस, नेटवर्क या सर्विस से कनेक्ट किया जा सके। इन्टरनेट एक्सेस आमतौर पर लोकल एरिया नेटवर्क से कनेक्ट किया जाता है।

इसकी मदद से कार के भीतर कई जानकारी मिलती है जो कि आमतौर पर नहीं मिलती है। यह इस डिजिटल दुनिया में कई तरह से ड्राइविंग, फीचर्स, सुरक्षा को प्रभावित करती है। इसे सेफ्टी, नेविगेशन, इंफोटेनमेंट, डायग्नोस्टिक व पेमेंट जैसे कैटेगरी में बांटा जा सकता है।

वर्तमान में विभिन्न कंपनियां अपने कनेक्टेड कार को अलग-अलग नाम से पुकारती है।
- हुंडई - ब्लूलिंक कनेक्टेड कार तकनीक - वेन्यू, क्रेटा, एलीट आई20
- किया मोटर्स - यूवो कनेक्टेड कार तकनीक - सेल्टोस, कार्निवल, सॉनेट
- जीप - यूकनेक्ट कार तकनीक - कम्पास
- एमजी मोटर - आईस्मार्ट कनेक्टेड तकनीक - हेक्टर, हेक्टर प्लस, जेडएस ईवी
- टाटा मोटर्स - आईआरए या इंटेलिजेंट रियल-टाइम असिस्ट- नेक्सन, नेक्सन ईवी
- मर्सिडीज - एमबक्स कनेक्टेड तकनीक

कनेक्टेड कार तकनीक के क्या है लाभ?
कनेक्टेड कार तकनीक से ढेर सारे फीचर्स का लाभ कार में बैठे लिया जा सकता है। जैसे कनेक्टेड कार के आने से अब आसानी से इन्टरनेट से म्यूजिक सीधे सुना जा सकता है, इसे स्मार्टफोन से कनेक्ट किया जा सकता है। इसके साथ ही वौइस् कमांड व हैंड्स फ्री कंट्रोल, ब्लूटूथ, हॉटस्पॉट, कंपनी के सर्विस सेंटर से सीधे सर्विस व फीडबैक लिया/दिया जा सकता है।

यह सुरक्षा को भी बेहतर करने में मदद करती है। कनेक्टेड कार की मदद से रोड साइड असिस्टेंस मिलती है, इससे तुरंत मदद मिल जाती है। इसके साथ ही लगातार ट्रैफिक अपडेट मिलते हैं, साथ ही कोलिजन वार्निंग जैसे चीजों की मदद भी मिलती है, जिससे घटना से बचा जा सकता है।

कनेक्टेड कार तकनीक के क्या है घाटे?
वैसे तो आपके कार कनेक्टेड कार तकनीक की वजह से हमेशा कनेक्ट रहते हैं और यह हमेशा आपके डेटा लेते रहते हैं, लेकिन कई बार यह डेटा हैक हो जाते हैं, जो कि आपके विरूद्ध उपयोग में लाये जा सकते हैं। वैसे तो अभी तक भारत में इस तरह की डेटा चोरी की शिकायत नहीं आई है लेकिन कुछ कंपनी पर आरोप लग चुके हैं।

वैसे आने वाले समय में सड़कों में अधिक से अधिक कनेक्टेड कार होने की वजह से खतरा और भी बढ़ सकता है। यह नई जनरेशन तकनीक हमारे पर्सनल जीवन में अधिक से अधिक दखल दे रही है, ऐसे में सुविधा की वजह से हम इसके नुकसान की ओर ध्यान नहीं देते हैं।


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