Vehicles Fined For Using Bull Bar: बुल बार लगे 300 से अधिक वाहनों का कटा चालान
मोटर वाहन अधिनियम 1988 में संशोधित के बाद वाहन के आगे बुल बार लगाना गैरकानूनी कर दिया गया है। कार के आगे टक्कर के दौरान नुकसान से बचाने के लिए लगाया जाने वाला बुल बार सड़क पर चल रहे अन्य लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। कार पर लगे बुल बार के टक्कर से गंभीर रूप से घायल होने और मौत के कई मामले सामने आये हैं।

इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने संशोधित मोटर वाहन अधिनियम में बुल बार पर बैन लगा दिया है। बैन के बाद अब कई राज्यों में ऐसे वाहनों की धर-पकड़ शुरू हो चुकी है। कई राज्यों में पुलिस बुल बार लगे वाहनों को पकड़ने और चालान करने के लिए अभियान चला रही है।

अभी हाल ही में तमिलनाडु के कोयंबतूर में ट्रैफिक पुलिस ने 300 से अधिक बुल बार लगे वाहनों को जब्त कर जुर्माना लगाया है। पुलिस ऐसे वाहनों में से बुल बार हटवाने के लिए मैकेनिक का भी सहारा ले रही है।

यही नहीं, तमिलनाडु में बुल बार लगे वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जा रहा है। ऐसे वाहनों पर पुलिस 1000 रुपये का जुर्माना लगा रही है। नए नियम के अनुसार बुल बार लगवाने से दुर्घटना के समय एयर बैग समय पर नहीं खुलता जिससे कार के अंदर बैठे लोगों के घायल होने का खतरा बढ़ जाता है।

कई बार ऐसे वाहन सड़क पर चल रहे लोगों के लिए भी खतरनाक साबित होते हैं। सड़क पर चलने वाले लोग बुल बार की चपटे में आने से बुरी तरह घायल हो सकते हैं और जान भी जा सकती है।

आम तौर पर कार ग्राहक दुर्घटना के समय कार को सुरक्षित रखें के लिए बुल बार लगवाते हैं, लेकिन क्रैश के समय यह कार की सुरक्षा नहीं करता बल्कि और अधिक खतरनाक हो जाता है।

बुल बार को कार के चेसी पर फिट किया जाता है। अगर कार की सामने किसी चीज से टक्कर होती है तो इसका असर कार के फ्रंट से होते हुए सीधा चेसी तक पहुंच जाता है, जिससे कार का ढांचा बिगड़ जाता है और अन्दर बैठे लोगों को भारी नुकसान होने की संभावना रहती है।

कार के अगले भाग को दुर्घटना झेलने के लिए बनाया जाता है ताकि कार के अन्दर बैठे लोगों को कम से कम नुकसान हो। दुर्घटना के समय यह हिस्सा झटके को बर्दाश करता है ताकि इसका असर अन्दर बैठे लोगों पर कम हो।

एक रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2019 में संशोधित मोटर वाहन अधिनियम लागू होने के बाद सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी आई है। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा जारी 9 राज्यों की सड़क दुर्घटनाओं की रिपोर्ट में सितंबर और अक्टूबर 2018 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मुकाबले 2019 के समान अवधि में काफी कमी आई है। आठ राज्यों में मृत्यु दर में औसत गिरावट लगभग 22 प्रतिशत थी।
नोट: तस्वीरों का इस्तेमाल सांकेतिक तौर पर किया गया है।


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