Central Govt. Cashless Scheme: सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को मिलेगा 2.5 लाख का कैशलेस इलाज
भारत में हर साल करीब 4.6 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इन सड़क दुर्घटनाओं में हर साल औसतन 1.48 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। भारत के कुछ ऐसे राज्य हैं, जहां पर सड़क दुर्घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं और इनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है।

इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु का नाम भी शामिल है। ध्याान देने वाली बात यह है कि इन तीनों राज्यों में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का कुल प्रतिशत पूरे देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का 30 प्रतिशत से भी ज्यादा है।

भारत की केंद्र सरकार सड़क दुर्घटना में घायल लोगों के इलाज के लिए नई कैशलेस स्कीम पेश करने की योजना बना रही है। बता दें कि ताजा जानकारी के अनुसार भारत सरकार यह योजना बना रही है कि अस्पतालों में सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों का 2.5 लाख रुपये तक का इलाज इस योजना के तहत किया जाएगा।

इस योजना को पेश करने का उद्देश्य यह है कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति के इलाज में किसी तरह की देरी ने होने पाए। जानकारी के अनुसार केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अपने स्वयं के योगदान के साथ एक मोटर वाहन दुर्घटना निधि की स्थापना करेगा।

इस योजना में परिवहन मंत्रालय की मदद जनरल इंश्योरेंस कंपनी (जीआईसी) के द्वारा भी की जाएगी। केंद्र सरकार के अनुसार जीआईसी बीमित वाहनों से संबंधित दुर्घटनाओं और हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों का खर्च उठाएगी, जबकि सड़क परिवहन मंत्रालय दुर्घटनाग्रस्त वाहनों का खर्च उठाएगी।

एनएचए यानी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के आईटी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों का कैशलेस इलाज करने में किया जाएगा, साथ ही दुर्घटना का पहला घंटा भी इसमें शामिल किया जाएगा।

आपको बता दें कि एएचए का आईटी प्लेटफॉर्म आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए भी पूरे देश में इस्तेमाल किया जाता है। जानकारी के अनुसार सड़क दुर्घटना पीड़ितों इस योजना का तहत मदद पहुंचाने के लिए केंद्रीय सड़क मंत्रालय के तहत एक खाता स्थापित किया जाएगा।


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