New Policy For Cab Aggregators: अब कैब चालकों को मिलेगा अधिक कमीशन, किराए में होगी कमी
केंद्र सरकार ने ओला और उबर जैसी कैब कंपनियों द्वारा राइड की भारी मांग के समय लिए जाने वाले अधिक किराए पर रोक लगा दी है। सरकार ने किराए पर लगाम लगाते हुए कंपनियों को आदेश दिया है कि कंपनियां कैब राइड की भारी मांग के समय मूल किराए से केवल 1.5 गुना अधिक किराया ही वसूल सकती हैं।

इसके अलावा कैब एप पर मिलने वाले डिस्काउंट को भी मूल किराये से 50 प्रतिशत तक निर्धारित कर दिया है। फिलहाल, कैब कंपनियां भारी मांग के समय 'सर्ज प्राइसिंग' यानी अधिक मांग के समय अधिक किराया का नियम अपनाती हैं। इससे मूल किराए में 20-30 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाती है।

आमतौर पर कैब चालकों के लिए राज्य सरकार न्यूनतम किराया निर्धारित करती हैं, जो कि 25-30 रुपये होता है। कुछ ऐसा ही नियम अब ओला और उबर जैसे ऑनलाइन कैब कंपनियों पर भी लागू होने वाला है। किराए के नए मानकों को ऑनलाइन कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी के लिए लाया जा रहा है।

केंद्र सरकार द्वारा 27 नवंबर को पेश किये गए कैब एग्रीगेटर गाइडलाइन में कैब के किराए को नियंत्रित करने की बात कही गई है। इस गाइडलाइन में कैब चालकों को किराए में 80 प्रतिशत का कमीशन देने का भी आदेश दिया गया है।

मौजूदा समय में ओला-उबर जैसी कैब कंपनियां अपने कैब पार्टनर को किराए का 74 फीसदी कमीशन के रूप में देती हैं। जाहिर है कि नए नियम से कैब चालकों की आय में वृद्धि होगी।

इसके अलावा सरकार ने नए गाइडलाइन में बताया है कि कंपनियां अपने कैब चालकों और नए चालकों से तय मानकों से अधिक कमीशन चार्ज नहीं कर सकती। सरकार ने यह भी बताया है कि कमीशन का निर्धारण कैब ड्राइवर की एक्सपीरियंस से नहीं किया जाना चाहिए।

देश में 2015-16 के दौरान ऑनलाइन कैब कंपनियां चालकों से कमीशन के तौर पर न्यूनतम वसूली करती थीं, जो समय के साथ बढ़ता चला गया। कमीशन के बढ़ने से औसतन कैब चालक की आय 90,000 रुपये से घटकर 50-60 हजार रुपये ही रह गई है। वहीं, कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में कैब चालकों की आय लगभग बंद हो गई थी।


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