Green Highway Corridor: ग्रीन हाईवे कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए वर्ल्ड बैंक से मिली सहायता, जानें
भारत और विश्व बैंक ने मंगलवार को राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों में ग्रीन हाईवे कॉरिडोर के निर्माण के लिए 500 मिलियन डॉलर की परियोजना पर हस्ताक्षर किया है। यह परियोजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की कार्यक्षमता और हरित प्रौद्योगिकियों को मुख्यधारा में लाने की क्षमता भी बढ़ेगी।

ग्रीन नेशनल हाईवे कॉरिडोर परियोजना में स्थानीय और सीमांत सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे स्थानीय उद्योगों और उद्यमियों को विकास मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में ग्रीन तकनीक और जैव-इंजीनियरिंग समाधानों का प्रयोग किया जाएगा। हरित तकनीक से इस प्रोजेक्ट से उत्पन्न होने वाले ग्रीन हाउस गैसों को भी कम किया जाएगा।

भारत में विश्व बैंक के निदेशक जुनैद अहमद ने कहा कि आर्थिक और सतत विकास के लिए कनेक्टिविटी देश के विकास के लिए दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। यह ऑपरेशन भारत की विकास रणनीति के समर्थन में इन दोनों प्राथमिकताओं को एक साथ लाता है।

यह परियोजना चार राज्यों में सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए कुशल परिवहन प्रदान करेगी, लोगों को बाजारों और सेवाओं से जोड़ेगी, दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों की कमी को कम करने के लिए निर्माण सामग्री और पानी के कुशल उपयोग को बढ़ावा देगी और जीएचजी उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी।

भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग लगभग 40 प्रतिशत सड़क यातायात का वहन करते हैं। हालांकि, इन राजमार्गों के कई हिस्सों में अपर्याप्त क्षमता, कमजोर जल निकासी संरचना और गलत निर्माण के वजह से दुर्घटना के मामले बढ़े हैं।

परियोजना मौजूदा संरचनाओं को मजबूत करेगी, नए फुटपाथ, जल निकासी की सुविधा और बाईपास का निर्माण, जंक्शनों में सुधार और सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने राजमार्ग निर्माण में आधुनिक और हरित प्रौद्योगिकियों के उपयोग से सड़क निर्माण की लागत को कम करने पर जोर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मार्च 2022 तक देश में सभी राष्ट्रीय राज्यमार्गों पर 100 प्रतिशत पौधरोपण के प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

एनएचएआई पेड़-पौधों के रोपण के लिए जूट, कपास जैसे प्राकृतिक चीजों का उपयोग पर जोर दे रही है। वृक्षारोपण प्रोजेक्ट में क्षेत्र के जलवायु के अनुसार उस जगह के हाईवे के लिए पेड़-पौधों का चुनाव किया जाएगा।

वृक्षारोपण की निगरानी के लिए 'हरित पथ' मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है। इस मोबाइल ऐप के जरिये जियो टैगिंग और वेब आधारित जियोग्राफिक इन्फाॅर्मेशन सिस्टम की मदद से हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे लगने वाले पेड़ पौधों की निगरानी की जाएगी।

जीपीएस नेविगेशन आधारित यह ऐप एनएचएआई को पेड़-पौधों के स्थान, विकास, रखरखाव गतिविधि, लक्ष्य और सभी वृक्षारोपण परियोजनाओं की उपलब्धियों और आवश्यकताओं की सटीक जानकारी प्रदान करेगा।


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