Cast Identity Stickers Banned In UP: वाहन पर जातिसूचक स्टीकर लगवाने वालों पर यूपी पुलिस हुई सख्त
उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र ने के शिक्षक की शिकायत पर पीएमओ ने वाहन पर जाती का प्रदर्शन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। उत्तर प्रदेश में पहले भी वाहनों पर जाती को प्रदर्शित करने वाली स्टीकर और नाम लगवाने के मामले सामने आए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार हर 20वें वाहन पर जाती से जुड़े स्टीकर या नाम पाए जाते हैं।

जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के शिक्षक हर्षल प्रभु ने इसकी शिकायत प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) से की थी। पीएमओ ने एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मुकेश चंद्र को मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया। डिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की अगुवाई में यूपी पुलिस ऐसे वाहनों की धर-पकड़ करने का अभियान चला रही है।

बता दें कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन में कहीं भी गतिसूचक शब्द लिखवाना गैरकानूनी है। अधिनियम के अनुसार, वाहन पर जातिसूचक शब्द लिखवाना समाज में जातिगत भेद-भाव को बढ़ावा देता है। ऐसे जातिगत प्रदर्शन से समाज में सामाजिक ताने-बाने को खतरा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक से वाहन में जाती सूचक स्टीकर लगवाने का चलन बढ़ा है। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार वाहन के नंबर प्लेट पर केवल रजिस्ट्रेशन नंबर लिखवाया जा सकता है। इसके अलावा वाहन के विंडस्क्रीन पर किसी भी तरह का पोस्टर या स्टीकर लगाना भी वर्जित है।

कुछ दिनों पहले ही झारखण्ड हाई कोर्ट ने राज्य ट्रांसपोर्ट विभाग को वाहनों के नंबर प्लेट पर नाम लिखवाने को लेकर सवाल किया है। न्यायालय ने राज्य ट्रांसपोर्ट विभाग से ऐसे वाहनों के नंबर प्लेट की जांच कराने और नाम हटवाने के लिए एक अभियान चलाने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने बताया कि नंबर प्लेट पर नाम का इस्तेमाल केवल संवैधानिक पदों पर बैठे कर्मचारी अपने आधिकारिक वाहन पर कर सकते हैं। इसके अलावा अन्य अधिकारियों के वाहन में या प्राइवेट वाहन में नाम लिखवाने की अनुमति नहीं है।

मामले पर सुनवाई करते हुए दो जजों की बेंच ने कहा कि पंचायत मुखिया से लेकर पंचायत सेवक, प्राइवेट कंपनियों के सचिव, एनजीओ के अधिकारी और राजनितनिक पार्टियों से संबंध रखने वाले लोग धड़ल्ले से अपना नाम वाहनों पर लिखवाते हैं। बेंच ने बताया कि हाई कोर्ट जजों को भी अपने प्राइवेट वाहन में नाम लिखवाने की अनुमति नहीं है।

कोर्ट ने निचली अदालतों में काम करने वाले अधिकारियों को अपने प्राइवेट वाहनों से नाम हटवाने का भी आदेश दिया है। बेंच ने झारखंड सरकार को ट्रैफिक नियम का सख्ती से पालन करवाने का आदेश भी दिया है।

बता दें कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार वाहन के नंबर प्लेट या कहीं और नाम लिखवाना गैरकानूनी है। मोटर वाहन कानून में केवल संवैधानिक पदों पर नियुक्त अधिकारियों को आधिकारिक वाहन के नंबर प्लेट पर नाम लिखवाने की अनुमति दी गई है।

अभी हाल ही में दिल्ली में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को अनिवार्य कर दिया गया है। दिल्ली में वाहन चालकों से अपील की जा रही है जल्द से जल्द अपने वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाएं। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2019 से बिकने वाले वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाना अनिवार्य कर दिया है।

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट दिखने में एक साधारण नंबर प्लेट से के जैसा ही होता है लेकिन इसकी तकनीकी विशेषताएं इसे अलग बनाती हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट में क्रोमियम होलोग्राम स्टीकर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमे वाहन से संबंधित जानकारी जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर, इंजन नंबर, चेसिस नंबर आदि अंकित होती है।


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