Regulations For Tint In Car Windows: कार की खिड़कियों में 50% से अधिक पारदर्शिता जरूरी
चलती कार के अंदर बढ़ती आपराधिक घटनाओं के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में कार की विंडस्क्रीन और खिड़कियों पर लगाई जाने वाली काली परत पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले के बाद से भारत में कार कंपनियों ने काली विंडस्क्रीन और शीशे लगाना बंद कर दिया है। अब कंपनियां अपनी कारों में साफ और पारदर्शी शीशे का ही इस्तेमाल करती हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार केवल 50 फीसदी या उससे ऊपर तक पारदर्शी शीशों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

हालांकि, कार में पारदर्शी और परत लगे शीशों के इस्तेमाल को लेकर आज भी कई भ्रांतियां हैं। हाल ही में बेंगलुरु पुलिस द्वारा एक कार चालक पर परत लगे शीशे के इस्तेमाल के कारण जुर्माना लगा दिया गया, जिस पर उसने सिटी पुलिस कमिश्नर कमल पंत से सवाल कर पूछा कि कार के शीशों में कितनी प्रतिशत पारदर्शिता जरूरी है?

पुलिस कमिश्नर ने सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कानूनी रूप से 50 प्रतिशत पारदर्शिता ही मान्य है। अगर पारदर्शिता 50 प्रतिशत से कम होती है तो जुर्माना किया जाएगा।

दरअसल, कई कार चालकों पर परत लगे शीशे के इस्तेमाल के आरोप में पुलिस द्वारा जुर्माना किया जा रहा है। ऐसे में अगर कार के शीशों की पारदर्शिता 50 प्रतिशत या उससे अधिक है तो पुलिस जुर्माना नहीं कर सकती। हालांकि, इस नियम की अनदेखी कर ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी कारों पर चालान कर रहे हैं।

इसके यह खबरें भी सामने आ रहीं है कि गाड़ी के नंबर प्लेट पर आईएनडी (IND) नहीं लिखवाने पर भी चालान किया जा रहा है। इस सवाल पर भी पुलिस कमिश्नर ने बताया कि गाड़ी पर आईएनडी (IND) लिखवाना अनिवार्य नहीं है और इसके नहीं होने पर ट्रैफिक पुलिस को चालान करने की अनुमति नहीं हैं।

हालांकि, कई पुलिसकर्मी ऐसे हैं जो मोटर वाहन नियम की अनदेखी कर वाहन चालकों को चालान रसीद कर रहे हैं। इसपर पुलिस कमिश्नर ने कहा कि ऐसे अधिकारीयों से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस की स्पेशल सेल काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि 100 नंबर पर कॉल कर ऐसे पुलिसकर्मियों का नाम दर्ज कर शिकायत की जा सकती है। बता दें, वाहन कंपनियों ने अपनी कुछ कार मॉडलों में ग्रीन टिंट वाले शीशों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यह शीशे 50 प्रतिशत से अधिक पारदर्शिता बनाए रखते हैं साथ ही कार के अंदर के तापमान को कम रखने में भी मदद करते हैं।


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