FIR Filed Against VW And Audi: फाॅक्सवैगन और ऑडी पर ग्राहक ने किया एफआईआर, यह है कारण
नोएडा के एक कार ग्राहक ने फाॅक्सवैगन और ऑडी पर कारों में चीट डिवाइस लगा कर उत्सर्जन को गलत तरीके से छिपाने के लिए एफआईआर दर्ज किया है। नोएडा के रहने वाले अनिलजित सिंह ने फॉक्सवैगन और ऑडी के भारतीय अधिकारीयों पर ग्राहकों से धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है।

भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का हवाला दिया गया है। शिकायत में फाॅक्सवैगन द्वारा किये गए वैश्विक उत्सर्जन स्कैम का हवाला दिया गया है, जहां कंपनी को अपनी कारों में एक चीटिंग डिवाइस का इस्तेमाल करते पाया गया था।

इस चीटिंग डिवाइस के इस्तेमाल से कंपनी अपनी कारों से हो रहे कार्बन और नाइट्रोजन उत्सर्जन को छिपा रही थी। इस डिवाइस की अनुपस्थिति में कारों में अनुमेय सीमा से 10-40 गुना अधिक उत्सर्जन होता है।

शिकायतकर्ता ने कहा कि 2018 में उसने सात ऑडी कारें खरीदी थीं। कार की डिलीवरी लेते समय उन्होंने पूछताछ की थी कि क्या इन कारों में भी ऐसे चीट डिवाइस लगाए गए हैं। कंपनी ने उन्हें बताया था कि भारत में कंपनी कि कारों में चीट डिवाइस नहीं लगाए जाते क्योंकि यहां के उत्सर्जन कानून यूरोप और अमेरिका जैसे सख्त नहीं हैं।

शिकायत में कहा गया है कि भारत में ऑडी और फॉक्सवैगन की कारें अनुमेय सीमा से 5-8 गुना अधिक नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन करती हैं। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा फॉक्सवैगन पर 500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने के बाद, शिकायतकर्ता ने महसूस किया कि उसे धोखा दिया गया है और उसकी मेहनत की कमाई बेकार चली गई है।

शिकायतकर्ता ने कंपनियों पर आरोप लगाया कि उसे गाड़ियों के उत्सर्जन के बारे में गलत जानकारी दी गई और अंदर लगाए गए डिवाइस के बारे में नहीं बताया गया। आरोप यह भी है कि कंपनी के अधिकारीयों ने बाजार में अपनी कार बेचने के लिए भारतीय उत्सर्जन नियमों की अनदेखी की है और शियातकर्ता के खिलाफ एक साजिश के तहत उसे खराब क्वालिटी वाली कारें बेची गई हैं।

बता दें, साल 2015 में अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने पाया कि फॉक्सवैगन की कारों में एक चीट डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है जो उत्सर्जन के आकड़ों को छिपाती है। अमेरिकी कोर्ट की जांच में पता चला कि इस उपकरण को ऐसे बनाया गया है कि यह उत्सर्जन टेस्ट के दौरान कार के इंजन के परफॉर्मेंस को कम कर उत्सर्जन को कम कर देती है, लेकिन जैसे ही कार सड़क पर निकलती है, कार का इंजन अपनी पूरी क्षमता पर काम करने लगता है और उत्सर्जन बढ़ जाता है। यह डिवाइस अमेरिका में तय मानकों से 30-40 प्रतिशत अधिक उत्सर्जन को छुपा रहा था।


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