20 Lakh Jobs Lost In Driving Sector: कोविड-19 महामारी के कारण 20 लाख ट्रक चालक हुए बेरोजगार
कोरोना वायरस के कारण परिचालन बंद होने से लाखों ट्रक और बस चालकों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में बस एवं ट्रक चालक संघ ने बताया कि देश भर में करीब 1 करोड़ से अधिक बस, ट्रक, ट्रॉली और मैक्सी-कैब ड्राइवर हैं, जिनमे से 20 लाख चालकों की नौकरी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि अगर परिस्थितियां सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में 15-20 लाख और चालक बेरोजगार हो सकते हैं।

संघ ने बताया कि प्राइवेट बस चालकों को तत्काल सरकार की सहायता की जरूरत है। प्राइवेट सेक्टर में वाहन चालकों को कर और ब्याज में छूट सरकार रहत पहुंचा सकती है। इसके अलावा निश्चित अवधि के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान कर सकती है।

संघ ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान 95 प्रतिशत बस और ट्रक का परिचालन बाधित हुआ है जिससे 1 करोड़ बस-ट्रक चालकों की आजीविका प्रभावित हुई है। कारोबार न होने के कारण ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने चालकों को वेतन देना बंद कर दिया है।

सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पर कुछ ही बसों को चलाया जा रहा है, उनमे से प्रवासी मजदूरों को ले जाने वाले बस शामिल है। कंटेनमेंट जोन के कारण कई राज्यों में परिवहन बाधित है। वहीं कई राज्यों ने अंतरराज्यीय बसों पर रोक लगा दी है जिससे लॉकडाउन खुलने के बाद भी परिचालन बंद है।

संघ ने कहा कि वाहनों पर ईएमआई में छूट सितंबर 2020 तक ही दी गई है, जिसके बाद ट्रक और बस चालक ईएमआई के भुगतान के लिए बाध्य हो जाएंगे और उस समय चालकों के लिए समय भुगतान करना और अधिक कठिन हो जाएगा।

संघ ने सरकार से मदद मांगते हुए कहा कि सरकार को तीन महीनों के लिए मोटर वाहन टैक्स में छूट देनी चाहिए। इसके अलावा राज्य के अंदर चलने वाले बसों और ट्रकों को टोल टैक्स से मुक्त रखना चाहिए।

संघ ने सरकार से मोटर इंश्योरेंस की अवधि को भी तीन महीने बढ़ाने की मांग की है। भारी वाहनों के लिए सालाना इंश्योरेंस 50,000 से 1,00,000 रुपये के बीच होता है। संघ ने भारी वाहनों के पर ब्याज पर 6 महीनों की छूट देने की मांग की है।


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