CNG Buses In Bihar: बिहार में अगले साल से चलाई जाएंगी 50 सीएनजी बसें
वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए बिहार परिवहन विभाग ने जनवरी 2020 से राज्य में 50 सीएनजी बसों को चलाने का ऐलान किया है। परिवहन विभाग 12 नए सीएनजी पंप भी शुरू करने जा रही है। फिलहाल, बिहार सरकार राज्य में 20 सीएनजी बसों का परिचालन कर रही है जो डीजल से सीएनजी में परिवर्तित किये गए हैं। इन बसों को दानापुर और फुलवारीशरीफ के रूट पर चलाया जा रहा है।

ट्रांसपोर्ट विभाग के अनुसार नए सीएनजी बस राज्य में प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक होंगे। यह बस सीएनजी पर चलेंगे इसलिए इन्हे चलाने का खर्च भी बहुत कम होगा। विभाग ने बताया कि दिल्ली में चलने वाले लो-फ्लोर बसों को अब बिहार में भी उतारा जाएगा।

विभाग ने बताया कि एक परियोजना के तहत राज्य में चलने वाले सभी डीजल ऑटो रिक्शा को सीएनजी में बदलने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। सरकार डीजल ऑटो के जगह सीएनजी ऑटो को भी चलाने पर विचार कर रही है। फिलहाल, पटना में 5,000 सीएनजी ऑटो चलाये जा रहे हैं।

पटना में गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की स्थापना बेगूसराय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 फरवरी, 2019 को की गई थी। पटना विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है, इसका कारण वाहनों से होने वाला वायु प्रदूषण है। साल 2018 में स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य में सीएनजी बसों को चलाने की अनुशंसा की थी।

भारत सरकार ने अगले 3 सालों में लिक्विड नेचुरल गैस के स्टेशनों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का निवेश की परियोजना तैयार की है। लिक्विड नेचुरल गैस लिक्विड पेट्रोलियम गैस की तुलना में अधिक ऊर्जा प्रदान करती है और इससे वाहनों को अधिक माइलेज भी मिलती है। इसके साथ ही यह डीजल के मुकाबले 30-40 प्रतिशत कम उत्सर्जन भी करती है।

केंद्र सरकार अगले 3 सालों में 1,000 स्टेशनों का निर्माण करेगी जिसके लिए 10,000 करोड़ रुपये के बजट को अनुमति दी गई है। इन स्टेशनों को प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के अंतर्गत बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वाहनों के फ्यूल के तौर पर एलएनजी ऑटोमोबाइल क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं। एलएनजी को आसानी से पेट्रोल और डीजल के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

फ्यूल के तौर पर एलएनजी के जलने से शून्य मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है साथ ही नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन भी 85 फीसदी से कम होता है। पहले चरण में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई को जोड़ने वाले गोल्डन हाईवे पर 50 एलएनजी स्टेशन बनाये जा रहे हैं।


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