Air India Should be Privatized: एयर इंडिया को प्राइवेटाइज करना एक मात्र रास्ता, मंत्री ने कही यह बात
कोरोना वायरस संक्रमण ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। इस वायरस संक्रमण के चलते पूरे देश में लगभग दो माह का लॉकडाउन लगाया गया था, जिसकी वजह से पूरे देश की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई है। लॉकडाउन के दौरान देश में सभी तरह के परिवहन माध्यम भी बंद किए गए थे।

जिसके चलते सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया की भी स्थिति काफी खराब हो गई है। मौजूदा समय में सरकार ने घरेलू हवाई यात्रा के साथ कुछ अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवाएं शुरू की हैं। लेकिन इसके बाद भी एयर इंडिया लगातार घाटे में जा रही है।

ताजा जानकारी के अनुसार सिविल एविएशन मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने यह बयान दिया है कि एयर इंडिया को घाटे से उबारने के लिए एक मात्र रास्ता इसका प्राइवेटाइजेशन करना बचा है। पुरी का कहना है कि एयर इंडिया सिर्फ सरकार द्वारा मिलने वाली फंडिंग से नहीं चल पाएगी।

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लगाए गए लॉकडाउन के बाद केंद्र सरकार भी ऐसी स्थिति में नहीं है कि वह एयर इंडिया को बड़े पमाने पर आर्थिक सहायता कर सके। एविएशन मिनिस्टर ने कहा कि "एयर इंडिया को ऐसे हाथों में दे देना चाहिए जिन्हें पता हो कि इसे कैसे चलाना चाहिए।"

आपको बता दें कि हाल ही में एयर इंडिया ने एक योजना शुरू की है जिसके तहत कर्मचारी छह महीने से लेकर पांच साल तक की ‘बिना वेतन के छुट्टी' लेने का विकल्प चुन सकते हैं। इसके अतिरिक्त एयरलाइन मैनेजमेंट को भी यह विकल्प दिया गया था कि वह जिसे चाहें उसे छुट्टी पर भेज सकते हैं।

आपको बता दें कि एयर इंडिया द्वारा जारी एक नोटिस में इस बात की जानकारी दी गई थी। कंपनी ने बताया कि "कर्मचारियों को बिना वेतन की छुट्टी लेने और मैनेजमेंट द्वारा छुट्टी पर भेजे जाने के विकल्प का फैसला बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 102वीं बैठक में लिया गया है।"

हालांकि, इस प्रावधान को केवल "उपयुक्तता, दक्षता, क्षमता, प्रदर्शन की गुणवत्ता, कर्मचारी के स्वास्थ्य, अतीत में ड्यूटी के लिए कर्मचारी की अनुपलब्धता, बीमार होने के कारण जैसे कारकों के आधार पर ही प्रयोग किया जा सकता है।


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