Air Pollution By Truck: प्रदूषण का स्तर रात में सबसे अधिक, ट्रक खराब कर रहे हैं हवा
शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों में आधी रात में चलने वाले ट्रक हैं। राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) के अनुसार पार्टिकुलेट मैटर 10 का 49 प्रतिशत और पार्टिकुलेट मैटर 2.5 का 49.5 प्रतिशत रात में चलने वाले ट्रकों से आता है। रात में ट्रकों से निकलने वाला धुआं वातावरण में फैल जाता है और सर्दियों में वायुमंडल पर जैम जाता है जिससे सूरज की रौशनी बाधित होती है।

नेरी ने रिसर्च में बताया है कि ट्रकों के धुंए में पाया जाने वाला पार्टिकुलेट मैटर 2.5 और पार्टिकुलेट मैटर 10 सबसे अधिक खतरनाक है। वातावरण में पार्टिकुलेट मैटर के अधिक जमाव से अकाल मृत्यु की घटनाएं बढ़ी हैं।

नेरी ने बताया है कि शहरों में अधिकतर ट्रकों को रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक चलने की अनुमति दी जाती है। इस दौरान शहर की हवा को सबसे अधिक नुकसान होता है। रात में ट्रकों से निकलने वाला धुआं सुबह तक हवा की गुणवत्ता को समाप्त कर देता है। नेरी ने इस समय हवा की गुणवत्ता को 'सबसे खराब' और 'खतरनाक' वर्ग में रखा है।

नेरी ने यह भी बताया कि ट्रकों में उत्सर्जन को नियमित रूप से जांचा नहीं जाता है जिसके कारण प्रदूषण फैलाने वाले ट्रक शहरों में घुस जाते हैं। सर्दियों के समय कार्बनडाइऑक्साइड के ऊपरी सतह पर जमने से प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक हो जाता है।

दिल्ली में हर साल सर्दियों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ऑड-ईवन नियम लागू करती है। इस साल सर्दियों के आने के पहले दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले फैक्टरियों को बंद किया गया है साथ ही प्रदूषण फैलाने पर कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।

दिल्ली में पहली बार ऑड-ईवन को 2016 में लागू किया गया था जिसके बाद साल दर साल तीन बार इसे लागू किया जा चुका है। पिछले साल भी प्रदूषण के काफी बढ़ने से ऑड-ईवन लागू कर दिया गया था।

दिल्ली में 1 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत हैं, जिनमे 30-40 लाख वाहन हर रोज सड़कों पर निकलते हैं। यह वाहन रेड ट्रैफिक सिग्नल पर रुकते हैं और इनका इंजन बंद नहीं होता है जिससे वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है।

दिल्ली और उसके आस-पास की इलाकों में किसानों द्वारा पराली के जलाए जाने से भी हवा जहरीली हो जाती है। किसानों को पराली जलने से रोकने के लिए सरकार ने एंटी डस्ट ड्राइव शुरू की है जिसमे पराली को नष्ट करने के लिए किसानों को जैविक डिकम्पोजर दिए जा रहे हैं। इसके छिड़काव से खेतों में पराली अपने आप ही सड़कर मिटटी में मिल जाती है।


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