पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में चलाएगी सीएनजी बसें, इंफ्रास्ट्रक्चर कर रही तैयार
पश्चिम बंगाल सरकार मार्च 2020 से प्रदूषण मुक्त सीएनजी बसें चलने जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार सीएनजी रिफिलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।

इसके साथ ही राज्य परिवहन विभाग मार्च 2020 तक शहर में 70 नई इलेक्ट्रिक बसों को भी पेश करेगा, जिससे इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 150 तक हो जाएगी।

राज्य में रिफिलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए पश्चिम बंगाल सरकार गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) से अनुबंध कर रही है।

इसके साथ ही राज्य सरकार शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयास में, शहर में और अधिक इलेक्ट्रिक बसें लाने की व्यापक योजना बना रही है।

शहर में 55 चार्जिंग स्टेशन हैं और परिवहन विभाग अधिक चार्जिंग स्टेशनों को विकसित करने के लिए काम कर रहा है। राज्य के बस डीपो का सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है।

राज्य परिवहन विभाग के अनुसार 2011 में एक 2 लाख लोग प्रतिदिन सरकारी बसों में यात्रा करते थे, लेकिन अब केवल कोलकाता और इसके आस-पास के क्षेत्रों में 6 से 8 लाख यात्री सरकारी बसों से यात्रा करते हैं।

परिवहन विभाग ने 31 मार्च, 2019 तक राज्य बसों से 2,500 करोड़ रुपये राजस्व कमाया जबकि, यह आंकड़ा 2016 में 1700 करोड़ रुपये और 2011 में 900 करोड़ रुपये था।

बंगाल सरकार राज्य में जल परिवहन प्रणाली के विकास पर काम रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने विश्व बैंक ने से अगले तीन वर्षों की अवधि के लिए 3,300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
भारत सरकार का लक्ष्य ही कि 2030 तक देश को 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक-वाहन राष्ट्र बनाना है। सरकार ने प्रस्तावित किया है कि 31 मार्च 2025 के बाद देश में बेचे जाने वाले 150 सीसी इंजन क्षमता से नीचे के दुपहिया और 31 मार्च 2023 के बाद बेचे जाने वाले तिपहिया वाहन बैटरी या इलेक्ट्रिक आधारित होने चाहिए। ऐसे में राज्य सरकारों को निर्धारित समय के भीतर ही डीजल बसों का विकल्प निकलने के लिए प्रयत्न करने चाहिए।


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