नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फॉक्सवैगन समूह पर लगाया 500 करोड़ रुपयें का जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जर्मन कार निर्माता फॉक्सवैगन समूह पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 500 करोड़ रुपयें का जुर्माना लगाया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दावा किया है कि फॉक्सवैगन समूह ने हानिकारक पुर्जों का इस्तेमाल किया है जिसने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है तथा फॉक्सवैगन समूह को अदालत के आदेशानुसार दो माह के अंतर्गत जुर्माना जमा करने को कहा गया है।

हालाँकि फॉक्सवैगन समूह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के बाद फॉक्सवैगन भारतीय समूह के एक प्रवक्ता ने मीडिया में बयान जारी किया है कि "फॉक्सवैगन भारतीय समूह इस बात को फिर से दोहराती है कि हमारी कारें भारत में लागू उत्सर्जन मानकों को ध्यान में रखकर बनायी जाती है। फॉक्सवैगन समूह अभी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल आदेश के कॉपी का इंतजार कर रही है। फॉक्सवैगन समूह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी।"

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा बनायी गयी एक कमेटी ने पहले यह सुझाया था कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के जुर्म में फॉक्सवैगन समूह पर 171.34 करोड़ रुपये का जुर्माना लगया जाएं। साथ ही कमेटी ने यह भी कहा था कि जुर्माने की राशि को देश भर के, खासकर नई दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम व आसपास के इलाकों की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए उपयोग करना चाहिए।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सौंपी गयी रिपोर्ट में कमेटी ने कहा था कि "फॉक्सवैगन समूह के वाहनों द्वारा अधिक NOx के उत्सर्जन से पर्यावरण हानि का अनुमानित खर्चा अगर दिल्ली को आधार माना जाएं तो लगभग 171.34 करोड़ रुपयें है। जुर्माने की राशि को कम कहा जा सकता है क्यूंकि नाइट्रोजन ऑक्साइड का भारत के पर्यावरण में कुल प्रभाव की गणना करने के लिए बहुत कम ही तरीके है इसलिये सिर्फ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के लिए जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना सिर्फ दिल्ली में छोड़ी गयी 435 टन NOx के लिए है यह इसलिए क्योंकि डाटा की कमी है। सालों से फॉक्सवैगन समूह के वाहनों द्वारा छोड़े जा रहे हानिकारक गैस को भी ध्यान में रखकर यह जुर्माना लगाया गया है।"

दिसंबर 2015 में, फॉक्सवैगन समूह ने पूरे देश भर से अपनी 3.2 लाख वाहनों के उत्सर्जक सॉफ्टवेयर को सही करने के लिए वापस मंगवाया था। ARAI द्वारा की गयी जांच में यहाँ खुलासा हुआ था कि फॉक्सवैगन समूह के वाहन BS-IV उत्सर्जन मानकों से 2.6 गुना ज्यादा उत्सर्जन कर रहे है इसलिए यह कदम उठाया गया था। यह खुलासा होने के बाद कि फॉक्सवैगन समूह अपनी वाहनों में उत्सर्जक मानकों को धोखा देने वाले सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे है, फॉक्सवैगन समूह को दुनिया भर में करोड़ों रुपयों का जुर्माना लगाया जा चुका है। फॉक्सवैगन समूह इस जुर्म में पहले भी 100 करोड़ रुपये का जुर्माना भर चुका है।


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