उत्तरप्रदेश में वाहनों के रजिस्ट्रेशन में आयी कमी, जाने क्या है कारण
देश में वाहनों की बिक्री में अभी भी सुधार नहीं हुआ है तथा यह सभी तरह से साफ नजर आ रहा है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में वाहनों की बिक्री में बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है।

उत्तरप्रदेश में लोग कार व बाइक खरीदने से हिचकते नजर आ रहे है। प्राइवेट व ट्रांसपोर्ट दोनों तरह के वाहनों की बिक्री में बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है। हाल ही में राज्य के परिवहन विभाग में जारी किये गए रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।

उत्तरप्रदेश में औसतन हर साल 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जाती है। अप्रैल से अक्टूबर में प्राइवेट वाहनों के रजिस्ट्रेशन में पिछले साल के मुकाबले 4.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है।

हालांकि सिंतबर के मुकाबले अक्टूबर के मध्य में वाहनों की बिक्री में थोड़ी बढ़त आयी है लेकिन यह दिवाली व धनतेरस के परिणाम के रूप में माना जा रहा है। अक्टूबर में प्राइवेट वाहनों की बिक्री 13.5 प्रतिशत बढ़ी है लेकिन ट्रांसपोर्ट वाहनों की बिक्री में बड़ी गिरावट आयी है।

राज्य में ट्रांसपोर्ट वाहनों का रजिस्ट्रेशन पिछले साल के मुकाबले 9.9 प्रतिशत रहा है तथा सिर्फ अक्टूबर में यह 16 प्रतिशत रहा है। इस सेगमेंट में ट्रक, टैक्सी, कैब, बस आदि शामिल है।

राज्य में किसी भी प्रकार का रोड टैक्स या रजिस्ट्रेशन चार्ज भी नहीं बढ़ाया गया है तथा पिछले 15 सालों में वाहनों के रजिस्ट्रेशन में इतनी बड़ी कमी नहीं आयी है।

वाहन बिक्री में कमी का कोई ठोस कारण नहीं बताया जा रहा है लेकिन माना जा रहा है कि इसका कारण आर्थिक मंदी या लोगों द्वारा वाहन में पैसा नहीं निवेश किये जाने के रूप में देखा जा रहा है।

देश में अक्टूबर महीने के पहले वाहनों की बिक्री में पिछले दस महीनों से गिरावट चल रही थी, जिस वजह से कई क्षेत्रों के कामकाज प्रभावित हुए थे। हालांकि पिछले महीने इसमें थोड़ा बहुत सुधार हुआ था।

सिर्फ कार व बाइक ही नहीं कई तरह के कॉमर्शियल वाहन भी बिक्री में मंदी से प्रभावित हुए है। आने वाले दिनों में इसमें और भी कमी होने के अंदेशा लगाया जा रहा है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य में वाहनों की बिक्री में कमी चिंता का विषय है। पिछले 15 सालों से वाहनों के रजिस्ट्रेशन में कमी नहीं होने के बाद इस तरह के हालत बहुत खतरनाक है।


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