नए मोटर व्हीकल एक्ट से हो रहा इंश्योरेंस कंपनियों को फायदा, इश्योरेंस के लिए लग रही लंबी लाइन
देश में वाहन खरीदने वाले हर शख्स को बीमा या इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदना अनिवार्य है। फिर चाहे कार हो, टू-व्हीलर या कमर्शियल वाहन, बिना पॉलिसी के कोई भी वाहन सड़क पर चल नहीं सकती है।

वहीं नए मोटर व्हीकल एक्ट की वजह से बिना इंश्योरेंस वाले चालकों की मुसीबत और बढ़ा दी है। लेकिन दूसरी ओर बीमा कंपनियों के लिए ये किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं है।

देश के ऑटो सेक्टर में पिछले कुछ समय से लगातारा मंदी चल रही है। इसका असर इंश्योरेंस कंपनियों पर भी हो रहा था। लेकिन पिछले कुछ महीनों की सुस्ती के बाद संसोधित मोटर व्हीकल एक्ट ने कारोबार में उछाल लेकर आया है।

संसोधित मोटर व्हीकल एक्ट में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं होने पर जुर्माने की राशि एक हजार से बढ़ाकर दो हजार रुपयें कर दी गई है। इस जुर्माने से बचने के लिए मोटर वाहन बीमा लेने वालों की संख्या बेहद बढ़ गई है।

आपको बता दें कि बिना बीमा के सार्वजनिक स्थल पर मोटर व्हीकल चलाना, मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अनुसार एक दण्डनीय अपराध है। कार इंश्योरेंस के अलावा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेना भी कानूनी रूप से अनिवार्य है।

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के तहत व्हीकल से सड़क पर चलने वाले किसी व्यक्ति या अन्य को या किसी प्रॉपर्टी को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाता है। ऐसी घटना के कारण व्हीकल ओनर/ड्राइवर पर बनने वाली कानूनी देनदारियों का निपटारा इसी पॉलिसी से होता है। अगर आपके व्हीकल की लास्ट डेप्रिशिएशन वैल्यू अगर जीरो भी बची है, तब भी आपको थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाना होगा।

वहीं कई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि देश में अभी 70 फीसद वाहन बिना बीमा के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनके बीमा कराने से साधारण बीमा कंपनियों की प्रीमियम राजस्व में अच्छी खासी वृद्धि की गुंजाइश है।

इस बारे में बात करते हुए आइसीआइसीआइ लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी के प्रमुख संजय दत्ता कहते है कि सितंबर में इश्योरेंस कराने वालों की संख्या में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है। ये सरकार द्वारा लागू किए गए नए मोटर व्हीकल एक्ट का असर है।

पहले लोग इश्योरेंस करवाने से हिचकते थे, लेकिन नए कानून ने लोगों के बीच इश्योरेंस को लेकर जागरूकता बढ़ा दी है। खासकर के नए बढ़े हुए जुर्माने की राशि की वजह से लोग लंबे कतारों में इश्योरेंस के लिए खड़े रहते है।

वहीं इस बारे में बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के मोटर बीमा कारोबार के प्रेसिडेंट गुरनीश खुराना कहते है कि भारत में सड़को पर जितने दोपहिया वाहन दौड़ते है, उनमें से 70 फीसदी का इश्योरेंस नहीं होता है। इसकी वजह लोगों के बीच इश्योरेंस को लेकर जागरूकता नहीं होना प्रमुख कारण है।

इसलिए कई दफा देखा गया है कि दुर्घटना के समय लोगों को भारी जुर्माना देना पड़ता है। लेकिन इश्योरेंस होने पर वह सारा खर्च इश्योरेंस कंपनियां उठाती है। इश्योरेंस के लिए ग्राहक के पास कई विकल्प होते है। ग्राहक पांच वषों के लिए भी इश्योरेंस ले सकता है।

इसलिए दोपहिया वाहन रखने वाले हर व्यक्ति को इश्योरेंस लेना चाहिए दुर्घटना में अगर तीसरे पक्ष को कोई क्षति हुई, तो उसकी भी भरपाई हो सके।' देश में 25 साधारण बीमा कंपनियां मोटर बीमा मुहैया करा रही हैं।


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