इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर आम बजट में 1.5 लाख रुपयें की छूट
वित मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में आम बजट पेश किया है। इस बजट में ऑटो सेक्टर के लिए बड़ी घोषणाएं की गई है। यह बजट खास है क्योंकि हाल के दिनों में भारतीय ऑटो उद्योग में काफी उतार -चढ़ाव देखा जा रहा है। इसलिए यह आम बजट ऑटो उद्योग के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

आपको बता दें की मंदी के दौर से गुजर रहा भारतीय ऑटो उद्योग इस बजट का लंबे समय से इंतजार कर रहा था। 2019 के आम बजट से ऑटो उद्योग को बहुत उम्मीदें थी। इस बजट को देख भारत सरकार की भविष्य के वाहन उद्योग में किए जाने वाले बदलाव को साफ समझा जा सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आम बजट को पेश करते हुए कई घोषणाएं की है। इनमें इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बहुत सारी घोषणाएं की गई है। सरकार पिछले कुछ समय से इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर कई तरह की योजनाओं पर काम कर रही थी। साथ ही इससे जुड़े ऑटो निर्माताओं को नए निर्देश भी दिया जा रहा था।

वित्त मंत्री ने आम बजट मे इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी रेट 12 से घटाकर 5 पर्सेंट कर दिया है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों पर लिए गए लोन के ब्याज पर 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त इनकम टैक्स छूट देने की भी घोषणा की है। सरकार का यह कदम देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को किफायती बनाने के लिए लिया गया है।

शुक्रवार को पेश किए गए बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी के लिए इंसेटिव की घोषणा हुई है। यह इंसेटिव फेम 2 योजना के तहत मिलेगा, जिसके लिए सरकार ने बजट में 10 हजार करोड़ रुपयें की राशि को मंजूरी दिया है। फेम 2 योजना का उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रिक वाहनो और उनके चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल तेजी से बढ़ावा देना है।

वहीं, बजट से पहले गुरुवार को आर्थिक सर्वे में कहा गया था कि इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए मैन्युफैक्चरर्स और यूजर्स को दिए जाने वाले इन्सेटिव से ज्यादा अच्छे चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि पेट्रोल-डीजल से चलने वाली वाहनों की तुलना में बैटरी से चलने वाली वाहनों की रेंज कम है।

सर्वे में कहा गया था कि इलेक्ट्रिक कार को फास्ट चार्जर्स से चार्ज करने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता है, जबकि स्लो चार्जर्स से इसे चार्ज करने में 8 घंटे तक का समय लग जाता है। ऐसे में यह एक महत्वपूर्ण पॉलिसी इश्यू है और देश में यूनिवर्सल चार्जिंग स्टैंडर्ड पॉलिसी लाने की जरूरत है। साथ ही इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत है।

इसके अलावा सर्वे में कहा गया कि बैटरी किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी के लिए सबसे जरूरी है। इस वजह से उपयुक्त बैटरी टेक्नॉलजी के डिवेलपमेंट को अत्यधिक महत्व दिया जाना चाहिए, जो भारत में उच्च तापमान की स्थिति में अच्छे से कम कर सके।

साथ ही वित्त मंत्री ने यह भी कहा है कि " सरकार सार्वभौमिक यात्रा के लिए सामान्य गतिशीलता योजना के तहत एक राष्ट्रीय परिवहन कार्ड लॉन्च करेगी। इस कार्ड का उपयोग देश भर में किसी भी तरह के परिवहन शुल्क का भुगतान करने के लिए किया जा सकता है। वही यह कार्ड रुपयें कार्ड उपयोगकर्ताओं को बस किराए, पार्किंग शुल्क, टोल शुल्क और दूसरों के बीच रेल परिवहन के लिए भुगतान करने की अनुमति देगा।

इस फैसले पर सरकार के पीडब्ल्यूसी पार्टनर कावन मुख्त्यान ने कहा है कि "आर्थिक विकास के लिए कनेक्टिवीटी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है। वही काउंटरपॉइंट रिसर्च के कंसल्टिंग डायरेक्टर विनय पिपरसानिया ने कहा, "इससे बजट से भारत में इलोक्ट्रोनिक क्रांति शुरू होनी चाहिए।वही वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कार्गो परिवहन के लिए भारत के नदी नेटवर्क का उपयोग करने की योजना बना रही है। जिससे सड़क और रेलवे नेटवर्क में ट्रैफिक कम हो जाएगा।

बजट पर ड्राइवस्पार्क के विचार
इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी में कमी निश्चित रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों को और प्रोत्साहित करेगी। साथ ही इसकी मांग में वृद्धि होगी। सरकार का यह फैसला इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ाने की दिशा में लिया गया कदम है और हम सभी को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए।


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