टोयोटा बंद कर रही है डीजल कारों का उत्पादन, अब ये कारें नहीं मिलेंगी
मारुति सुजुकी और रेनॉल्ट के बाद टोयोटा इंडिया ने भी छोटी डीजल कारों का उत्पादन बंद करने की घोषणा की है। टोयोटा 1 अप्रैल 2020 से छोटे डीजल इंजन कारों जैसे लिवा, इटियॉस क्रॉस, इटिओस और कोरोला का उत्पादन बंद कर रही है।

टोयोटा का कहना है कि डीजल मोटर को बीएस-6 में अपग्रेड करने पर कार बनाने की लागत 1.5 लाख रूपए तक बढ़ जाएगी। जिससे छोटी बजट गाड़ियों के दाम काफी बढ़ जाएंगे।

छोटी कार सेगमेंट में ग्राहकों के लिए लगभग 1-1.5 लाख रुपये की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण होगी और उनकी खरीद से उन्हें नुकसान होगा। इसके बजाय, ग्राहक सस्ते बीएस 6 पेट्रोल मॉडल पसंद ज्यादा पसंद करेंगे, जो निवेश पर बेहतर रिटर्न देगी।

भारत में टोयोटा की कारों की सेल में 85 फीसदी हिस्सेदारी डीजल कारों की होती हैं। जबकि टोयोटा की 60 फीसदी कारों की सेल फॉर्च्यूनर और इनोवा जैसे बड़े डीजल कारों से होती है।

बाजार में छोटे डीजल कारों के सिमित योगदान और उन्हें अपग्रेड करने में आने वाली लागत की वजह से जापानी कार निर्माता टोयोटा ने छोटी डीजल कारों को बंद करने का फैसला लिया है।

टोयोटा ने 1.3-लीटर डीजल इंजन को अपग्रेड नहीं करने का फैसला किया है जो वर्तमान में लीवा, इटिओस क्रॉस, इटिओस और कोरोला जैसी कारों में इस्तेमाल किया जा रहा है। भविष्य में फॉर्च्यूनर और इनोवा जैसे बड़े वाहनों में बीएस 6 कंप्लेंट डीज़ल इंजन के विकल्प मौजूद रहेंगे।

इटिओस लाइनअप भारत में काफी पुरानी हो चुकी है, इसलिए इस कार में आगे निवेश नहीं करना कंपनी के लिए सही फैसला होगा।

कोरोला में डीजल वेरिएंट को बंद करने से टोयोटा पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इस कार की कुल बिक्री लगभग 500-600 यूनिट प्रति माह ही है।

यह स्पष्ट है कि डीजल मोटर को अपग्रेड करने के लिए आवश्यक निवेश जापानी कार निर्माता के लिए फायदेमंद नहीं होगा। मारुति सुजुकी और रेनॉल्ट जैसी बड़ी कार कंपनियों ने भी ऐसा ही फ कर रही हैं।

ड्राइवस्पार्क के विचार
छोटे इंजन का डीजल कार बाजार में उतरना अब कंपनियों के लिए फायदे का सौदा नहीं रहा। अधिकतर भारतीय ग्राहक मिडिल प्राइस कार लेना पसंद करते हैं जो उनके बजट में आए। डीजल कार के दाम बढ़ने से लोगों का झुकाव पेट्रोल कारों पर बढ़ेगा जो डीजल कारों के लिए सही नहीं है। मारुति, रेनॉल्ट जैसी कंपनियां अब छोटी डीजल कारों पर निवेश नहीं कर रहीं हैं। फिलहाल सभी कार कंपनियां बीएस-4 के स्टॉक को निकलने में लगी हुईं हैं।


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