इलेक्ट्रॉनिक वाहन कंपोनेंट निर्माताओं को मिलेगी टैक्स में छूट, जानिए क्या है सरकार का प्रस्ताव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के कंपोनेंट्स का निर्माण करने वाली नई कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में छूट मिलेगी। उन्होंने कहा कि 1 अक्टूबर 2019 के बाद स्थापित कंपनियों को 17.16 प्रतिशत की दर से कॉर्पोरेट टैक्स का भुगतान करना होगा। बता दें कि वर्तमान में कंपनियों को 22.55 प्रतिशत कॉर्पोरेट टैक्स भरना पड़ता है।

वित्त मंत्रालय का मानना है कि इस कदम से ई-वाहनों के कंपोनेंट्स जैसे चार्जर, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का देश में ही निर्माण करने में मदद मिलेगी जबकि ई-वाहनों में प्रयोग होने वाले एयरबैग, इनफ्लेटर और सेंसरों का आयत जारी रहेगा।

हर वर्ष वाहनों में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स की मांग बढ़ रही है और नई रियायतों से ऐसे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों को देश में ही बनाने पर बल मिलेगा। निर्माता देश में उत्पादों का स्थनीयकरण बढ़ा रहे हैं, टैक्स की दर घटने से इन निर्माताओं को फायदा पहुंचेगा ही साथ में नए उद्योगों के सृजन में भी मदद मिलेगा।

मंत्रालय को उम्मीद है कि इससे ऑटो उद्योग और उसकी सहायक आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिलेगा, दोनों का देश के मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में 49 प्रतिशत का योगदान है।

ई-वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी, चार्जर व इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण करने वाली कंपनियों को नए टैक्स स्लैब से फायदा पहुंचेगा। सरकार चाहती है कि इस उद्योग क्षेत्र में स्थानीय निर्माताओं को तवज्जो दी जाए।

भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी, मारुति सुजुकी अपने वाहनों में लगने वाले इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का आयत करती है। मारुति ने सरकार के इस कदम की सराहना की है और कहा कि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से नए उद्यमी इस उद्योग के प्रति आकर्षित होंगे जिससे उद्योग को देश में ही केंद्रित किया जा सकेगा साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता को भी बढ़ाने में बल मिलेगा।

ड्राइवस्पार्क के विचार
टैक्स स्लैब में कटौती से ऑटो इंडस्ट्री व इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों को राहत मिलेगी। वहीं इस क्षेत्र में नए निर्माता भी आकर्षित होंगे जिससे रोजगार की नई संभावनाएं उत्पन्न होंगी। उद्योगों के स्थानीयकरण से कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इसका फायदा ग्राहकों को होगा।


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