ओला-उबर के सर्ज प्राइस बढ़ेंगे, सरकार की आगामी नई नीतियां हैं वजह
सरकार नए मोटर वाहन एक्ट के तहत ओला-उबर जैसे कैब एग्रिगेटर्स को जल्द ही सर्ज प्राइसिंग करने की छूट दे सकती है। इस नई नीति से ओला-उबर अपने कस्टमर्स से पीक ऑवर के दौरान तीन गुना अधीक किराया वसूल सकते हैं।

हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में छाई मंदी के लिए ओला-उबर जैसे कैब एग्रिगेटर्स को जिम्मेदार ठहराया था। उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई थी। अब सरकार कैब एग्रीगेटर्स को बेस फेयर तीन गुना तक किराया बढ़ाने की मंजूरी दे सकती है।

सर्ज प्राइसिंग से मतलब है कि पीक आवर में लेने वाले किराये यानि जब मांग सबसे ज्यादा हो तब ओला-उबर जैसी कैब कंपनियां ज्यादा किराया वसूल सकती हैं। कैब एग्रिगेटर्स मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बैठने के लिए सरकार से सर्ज प्राइसिंग की वकालत करते रहे हैं।

सरकार इन कैब एग्रिगेटर्स को बेस फेयर से तीन गुना तक किराया बढ़ाने की अनुमती दे सकती है। संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट पास होने के बाद कैब एग्रीगेटर्स के लिए भी नए नियम लाए जा रहे हैं। एक्ट में पहली बार कैब एग्रीगेटर्स को डिजिटल इंटरमीडियरी यानी मार्केट प्लेस माना गया है।

कर्नाटक ऐसा पहला राज्य है जहां कैब एग्रिगेटर्स द्वारा न्यूनतम और अधिकतम किराया तय करने का नियम निर्धारित है। राज्य सरकार ने एप बेस्ड कैब कंपनियों के लिए वाहन की कीमत के अनुसार सर्ज प्राइस स्लैब बना रखे हैं। लग्जरी कैब्स के लिए सर्ज प्राइस बेस फेयर का 2.25 फीसदी है, वहीं छोटी कैब के लिए यह 2 गुना है।

ग्राहकों के लिए सर्ज प्राइस परेशन करने वाला है। पीक ऑवर, जैसे त्योहारों का समय या फिर जब बारिश हो तब सर्ज प्राइस लिया जा सकता है। अगर आप आप कैब के अंदर हों और बारिश होने लगे तब भी सर्ज प्राइस चार्ज किया जा सकता है।

अगर नई पाॅलिसी लागू होती है तो इससे कैब चालकों और कंपनियों को फायदा होगा लेकिन यह लोगों की जेब पर निश्चित ही भारी पड़ेगा।

सर्ज प्राइस के बढ़ोत्तरी के समर्थन में कैब एग्रीगेटर्स ने कहा है कि अगर पीक ऑवर में किराये बढ़ाये जाते हैं तो इससे उस समय के दौरान ज्यादा संख्या में कैब ड्राइवर आने की कोशिश करेंगे जिससे ग्राहकों को रश ऑवर के समय भी आसानी से कैब मिलेगी।

ड्राइवस्पार्क के विचार
सरकार की इस नई नीति से कैब कंपनियों को फायदा होगा, लेकिन सर्ज प्राइसिंग से ग्राहकों को समान राइड के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। राइड शुरु करते समय एप पर दिखाए गए किराये और अंत में आने वाले किराये में अंतर होने के कारण पेमेंट से जुड़ी परेशानियां आ सकती हैं। उम्मीद है सरकार और कैब कंपनियां इस नीति से जुड़ी जानकारियां लोगों को मुहैया कराएंगी।


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