अब तक बिक चुके हैं 79 लाख से ज्यादा फास्टैग, प्रतिदिन 20-25 करोड़ का राजस्व हो रहा जमा
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा जारी एक तजा रिपोर्ट के अनुसार देश भर में 30 नवंबर 2019 तक लगभग 79 लाख से ज्यादा फास्टैग बेचे जा चुके हैं।

पिछले महीने फास्टैग की बिक्री में 24 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है, जबकि अक्टूबर तक 63.71 लाख फास्टैग की बिक्री की गई थी। नवंबर में 15 लाख से ज्यादा फास्टैग की बिक्री हुई थी, जो अबतक सबसे ज्यादा है।

नवंबर 2019 में फास्टैग द्वारा कुल 3.49 लाख ट्रांजेक्शन किए गए हैं, जिससे कुल 773.95 करोड़ रुपये की राशि इकठ्ठा की गई। फास्टैग के भुगतान के लिए 24 बैंक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे हैं।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एनएचएआई) देश भर में 21 नवंबर से फास्टैग मुफ्त में जारी कर रही थी, जिसके बाद फास्टैग बिक्री में भारी वृद्धि देखी गई।

मंत्रालय के अनुसार देश के 560 टोल प्लाजा में फास्टैग के द्वारा टोल भुगतान लिया जा रहा है और हर रोज कुछ नए टोल प्लाजा को फास्टैग की सुविधा के अंतर्गत जोड़ा जा रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार हर दिन 10 लाख से ज्यादा टोल कलेक्शन फास्टैग से किए जा रहे हैं, जिसमे प्रतिदिन 20-25 करोड़ का राजस्व इकठ्ठा किया जा जा रहा है।

फास्टैग एक डिजिटल स्टीकर है जिसे गाड़ियों के शीशे पर लगाया जाता है। यह रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम करती है।

जब गाड़िया टोल प्लाजा से गुजरेंगी तब फास्टैग से जुड़े बैंक या प्रीपेड अकाउंट से अपने आप ही टोल टैक्स का भुगतान हो जाता है।

यह व्यस्था कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने और टोलप्लाजा में लगने वाली गाड़ियों की भीड़ को खत्म करने के उद्देश्य से की गई है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
फास्टैग की व्यवस्था से न केवल टोल भुगतान करने में आसानी होगी बल्कि इससे प्रदूषण से बचने में भी मदद मिलेगी। इस स्कीम में गाड़ियों को टोल देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा जिससे टोल प्लाजा में लगने वाली गाड़ियों की भीड़ से भी निजात मिलेगी। फास्टैग का प्रयोग सुरक्षा और वाहन की ट्रैकिंग की दृस्टि से भी किया जा रहा है। इसमें सरकार के पास टोल प्लाजा से गुजरने वाली हर गाड़ी का रिकॉर्ड होगा।


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