यात्री वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 12.9 फीसदी की गिरावट की गई दर्ज, नहीं हुआ भारी डिस्काउंट का फायदा
ऑटोमोबाइल डीलर संघ, फाडा ने मासिक वाहन रजिस्ट्रेशन से संबंधित रिकॉर्ड जारी करते हुए गाड़ियों की घटती हुई बिक्री की तरफ इशारा किया है।

फाड़ा ने सितंबर 2019 की गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन से जुड़ी रिपोर्ट को आधार मानते हुए कहा है कि देश में त्योहारों के आगमन के बावजूद बिक्री में कोई बेहतर बदलाव देखने को नहीं मिला है।

फाडा के अनुसार वार्षिक तौर पर गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन संख्या 12.9 फीसदी तक गिर चुकि है। पैसेंजर वाहनों की स्टॉक में मामूली बढ़त देखने को मिली है वहीं 2-व्हीलर वाहनों के स्टॉक में वृद्धि अभी भी सबसे ज्यादा है।

व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में 18.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है जबकि पैसेंजर वाहनों की रजिस्ट्रेशन में 20.1 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी 1.8 प्रतिशत का मामूली इजाफा देखने को मिला है।

फाडा के अध्यक्ष आशीष काले का कहना है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री अभी भी भरी दबाव से गुजर रही है। सरकार की प्रोत्साहन नीतियों का असर आंशिक रूप से हुआ है।

सितंबर के महीने में भी ऑटो सेक्टर में मंदी है, इससे पता चलता है कि सरकार के सकारात्मक कदमों का फायदा अपेक्षित रूप से नहीं हुआ है।

साल के तीसरे तिमाही में भी गाड़ियों की स्टॉक संख्या में कुछ खास कमी नहीं आई है। वाहन निर्माता पिछले साल से ही गाड़ियों की बढ़ी हुई स्टॉक से परेशान हैं।

हालांकि वाहन निर्माताओं को उम्मीद है कि इस फेस्टिव सीजन के दौरान बढ़े हुए स्टॉक में कुछ कमी आ सकती है क्योंकि अगले साल अप्रैल से देश में बीएस-6 उत्सर्जन मानक लागू हो रहे हैं।

बता दे कि देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई मंडी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कंपनियों से लिए जाने वाले कॉर्पोरेट टैक्स में भारी कटौती की है। साथ ही सेक्टर में नए कंपनियों को भी प्रोत्साहन देने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में कमी की गई है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती के बाद भी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। सेक्टर में मंदी के कारण व्यावसायिक, पैसेंजर, दोपहिया अथवा तिपहिया वाहनों के स्टॉक में कमी नहीं आ रही है। कंपनियां फेस्टिव सीजन के दौरान डिस्काउंट ऑफर्स की पेशकश कर के बिक्री बढ़ाना चाहतीं हैं।


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