चालान नहीं भरने वालों को मुंबई पुलिस देगी अरेस्ट वारंट, 80 करोड़ का चालान है बकाया
मुंबई पुलिस ट्रैफिक फाइन न भरने वाले वाहन चालकों को गिरफ्तार कर सकती है। ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों से जुर्माना वसूलने के लिए मुंबई पुलिस के इस निर्णय को सबसे कठोर माना जा रहा है।

मुंबई ट्रैफिक पुलिस को 80 करोड़ रुपये का फाइन वसूल करना है। बकायेदारों को कई बार जुर्माना भरने के लिए पुलिस आगाह कर चुकी है, इसके बावजूद पर्याप्त संख्या में चालान जमा न होने से नाराज पुलिस ने अरेस्ट वारंट जारी करने का फैसला लिया है।

सितंबर में संशोधित मोटर वाहन एक्ट में फाइन में अप्रत्याशित वृद्धि से पुरे देश में विवाद उत्पन हो गया था। नए नियम के तहत ट्रैफिक जुर्माने में 10 फीसदी की भारी बढ़ोत्तरी की गई है जिसका कई राज्यों में विरोध हुआ।

सरकार के अनुसार फाइन में बढ़ोत्तरी से लोगों की जेब ज्यादा ढीली होगी, जिससे बचने के लिए लोग ट्रैफिक नियम का पालन करना सीखेंगे और इससे सड़क हादसों में भी कमी आएगी।

हालांकि, फाइन बढ़ने के बाद किए गए जुर्माने को मुंबई ट्रैफिक पुलिस वसूल नहीं कर पा रही है। नियम तोड़ने वालों पर फाइन लगाना आसान है, लेकिन इन्हे वसूल करना पुलिस के लिए परेशानी का काम बन गया है।

मुंबई पुलिस ने 1 सितंबर के बाद 80 करोड़ का ई-चालान किया है। वाहन चालकों द्वारा किए गए अपराध के वीडियो रिकॉर्ड का साक्ष्य लेकर पुलिस ने वाहन मालिकों को पत्र भी भेजा था, लेकिन अधिकतर लोगों ने इसके बावजूद भी चालान जमा नहीं किया।

पुलिस के अनुसार अभी तक 27 लाख ई-चालान से जुर्माना वसूल करना बाकि है। जिनमे से 9,000 चालान की राशि 5000 रुपये से अधिक है। इनमें से कुछ ई-चालान ऐसे हैं जिनका जुर्माना 2016 से बकाया है।

पुलिस ने बकाया चालान जमा करवाने के लिए वाहन मालिकों को पत्र और ईमेल भी भेजे लेकिन पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसलिए अब पुलिस बकायेदारों को अरेस्ट वारंट सौपेंगी।

पहले ट्रैफिक पुलिस बकायेदारों से जुर्माना वसूलने के लिए उनका ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर लेती थी और जुरमाना वसूलने लाइसेंस वापस लौटा दिया जाता था।लेकिन ई-चालान में वाहन का फोटो लेकर वाहन मालिक के नंबर पर जुर्माने से संबंधित मैसेज भेजा जाता है।

इसमें कई बार फोन नंबर आरटीओ में रजिस्टर्ड न होने पर या पता गलत होने पर वाहन मालिक से संपर्क नहीं हो पता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई पुलिस बकायेदारों को 1 दिसंबर से अरेस्ट वारंट भेजने का अभियान चलाएगी।

ड्राइवस्पार्क के विचार
यातायात नियमों के मानदंडों को पूरा करने और जुर्माने के भुगतान से बचने के कई उदाहरण हैं। कुछ वहां ऐसे हैं जिनपर 1 लाख से अधिक का जुर्माना बकाया है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।

लेकिन, कई मामले ऐसे भी है जिनमे वाहन चालकों को यह भी पता नहीं है कि उनके वाहन के खिलाफ कोई मामला है। इस मामले में अरेस्ट वारंट देना न्यायसंगत नहीं होगा।


Click it and Unblock the Notifications








