15 साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए कबाड़ नीति लायगी सरकार, मारुति और टोयोटा लगायगी प्लांट
भारत सरकार जल्द ही देश में 15 साल से पुराने वाहनों के लिए कबाड़ नीति को लागू कर सकती है। सरकार इस संबध में लगातार काम कर रही है। इसका मकसद देश में वाहनों से बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाना है।

सरकार इस बारे में नीति आयोग के साथ मिलकर इस नीति को बनाया गया है। यह पूरा होने के अंतिम चरण में है। इसके तहत 15 साल या इससे ज्यादा पुराने वाहनों को हटाया जाएगा। हालांकि इसे वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिलनी बाकी है। साथ ही राज्यों के साथ भी कुछ मुद्दों पर सहमति बननी बाकी है।

होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया की बीएस-6 उत्सर्जन मानक वाली नई एक्टिवा 125 की लॉन्च के मौके पर नितिन गडकरी ने कहा कि बेकार हुए वाहनों के स्क्रैप (कबाड़) का इस्तेमाल ऑटोपार्ट व अन्य चीजों को बनाने के लिए किया जाएगा।

इससे पहले गडकरी ने सचिवों की समिति को वॉलेंटरी व्हीकल फ्लीट मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (वी-वीएमपी) पर कॉन्सेप्ट नोट भेजा था। इसका मकसद स्वेच्छा से स्क्रैपिंग और प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को बदलने के लिए माहौल तैयार करना है।

उन्होंने यह भी साफ किया है कि वाहनों पर जीएसटी दरों में कटौती का प्रस्ताव पहले ही वित्त मंत्री के सामने रखा जा चुका है। जीएसटी काउंसिल में शामिल सदस्यों राज्यों को भरोसे में लेकर ही इस पर फैसला किया जाएगा।

वहीं सरकार की पुराने वाहनों को कबाड़ करने की नीति को देखते हुए कार कंपनियां भी आगे आ रही है। देश की सबसे बड़ी ऑटो निर्माता कंपनी मारूति सुजुकी ने पुराने वाहनों को कबाड़ करने के लिए टोयोटा के साथ मिलकर प्लांट लगाने की योजना बनाई है।

मारुति ने इसके लिए टोयोटा सब्सिडियरी कंपनी तूशो से करार किया है। यह कंपनी वाहनों को तोडने काम करती है और साथ ही उनके पार्टस को कबाड़ में बिक्री के लिए उपलब्ध करायगी।

इससे पहले महिंद्रा एंड महिंद्रा अपनी सब्सिडियरी कंपनी महिंद्रा असेलो के जरिये वाहनों को कबाड़ करने के लिए स्क्रैप प्लांट लगाएगी और इसके लिए पब्लिक सेक्टर की कंपनी एमएसटीसी के साथ गठजोड़ किया है।

यह रीसाइकिल प्लांट ग्रेटर नोएडा में लगाया जाएगा। टोयोटा तूशो पहले ही भारत में एक्टिव है और ऑटो पार्ट्स के साथ कंपोनेंट्स के आयात-निर्यात का काम करती है।


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