मारुति सुजुकी AGS: ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन से अब ड्राइविंग और भी आसान
मारुति सुजुकी भारतीय वाहन बाजार की हमेशा से सबसे आगे रही है। यह बात ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन वाली कारों के विषय में भी सही साबित हुई है, क्योकि मारुति सुजुकी ही वह पहली कंपनी थी जिन्होंने एंट्री लेवल कार में यह विकल्प उपलब्ध कराया था।

मारुति सुजुकी की कारें वर्तमान में वाहन लाइनअप में तीन विभिन्न ट्रांसमिशन विकल्प ऑटोमेटिक (AT), कंटीन्यूअस वैरिएबल ट्रांसमिशन (CVT) व ऑटोमेटेड मैन्युअल ट्रांसमिशन (AMT) जिसे ऑटो गियर शिफ्ट (AGS) नाम दिया गया है, में उपलब्ध करा रही है।

मारुति सुजुकी ने AGS को भारत में सेलेरियो हैचबैक के साथ 2014 में उतारा था। तब से नई AGS ट्रांसमिशन का प्रयोग ऑल्टो K10, वैगन आर, स्विफ्ट, इग्निस, डिजायर व भारत की सबसे अधिक बिकने वाली एसयूवी विटारा ब्रेजा में भी किया गया है।

AGS बिल्कुल AMT ट्रांसमिशन की तरह है जो इलेक्ट्रो हाइड्रॉलिक सिस्टम का उपयोग करता है तथा इसे पॉवर मैन्युअल ट्रांसमिशन में लगे एकट्युटर से मिलता है। यह सिस्टम क्लच के कार्य को नियंत्रित करता है तथा गियर ऑटोमेटिक रूप से शिफ्ट होता है यानि ड्राइवर अब और आसानी से वाहन चला सकते है।

AMT से AGS के अलग होने का कारण यह है कि मारुति सुजुकी ने ट्रांसमिशन कंट्रोल यूनिट भी जोड़ दिया है जो कि एक्सिलरेटर पैडल के पोजीशन व वाहन के स्पीड के आधार पर हाइड्रॉलिक सिस्टम के कार्यों को नियंत्रित करता है।

मारुति सुजुकी का ऑटो गियर शिफ्ट ड्राइवर को एक सुखद अनुभव देता है। दो पैडल सेटअप के कारण ड्राइविंग को आसान बनाने के साथ ही AGS कारों को माइलेज को मैन्युअल गियरबॉक्स वाले कारों के जितना रखने में मदद करता है। यह भारत में बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योकि नई कार खरीदते समय माइलेज ग्राहक के लिए एक बहुत बड़ा पॉइंट होता है।

इसलिए AGS नई कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए एक बेहतर विकल्प है, साथ ही उनके लिए भी अच्छा है जो मैन्युअल ट्रांसमिशन वाले वाहन को अपडेट करके नई कार लेना चाहते है।

मारुति सुजुकी के AGS वाले कारों में ड्राइवर को हर बार गियर बदलते समय क्लच पैडल दबाने की जरूरत नहीं होती है, इसका फायदा यह है कि वह रोड पर अधिक अच्छे से ध्यान दे पाएंगे। इसका परिणाम होगा कि सफर पहले से अधिक सुरक्षित होगा क्योकि ड्राइवर का पूरा ध्यान सिर्फ रोड पर ही रहेगा।

यह पहाड़ी इलाकों में बहुत जरूरी हो जाता है, जहां पर बहुत से तेज मोड़ व ऊंचाई बढ़ती घटी रहती है, वहां लगातार गियर को शिफ्ट करना पड़ता है। मारुति सुजुकी का AGS गियरबॉक्स गियर शिफ्ट व क्लच का ध्यान रखता है, इससे ड्राइवर पहाड़ी सड़कों में आगे की ओर ध्यान दे सकता है।

वह ड्राइवर जो गियर शिफ्ट में थोड़ा नियंत्रण चाहते है उनके लिए मारुति सुजुकी AGS गियरबॉक्स मैन्युअल मोड भी प्रदान करता है। मैन्युअल मोड में AGS सिस्टम क्रमबद्ध गियरबॉक्स की तरह काम करता है जिसमें हाइड्रोलिक्स क्लच का कार्य देखता है तथा ड्राइवर गियर बदलने के लिए गियर को ऊपर व नीचे करता है।

इसका मतलब यह है कि पहाड़ी रास्तों पर ड्राइवर को जो सही लगता है उस गियर में चला सकता है खासकर तब जब चुना हुआ गियर बेहतर परफॉर्मेंस देता हो।मारुति सुजुकी की AGS तकनीक AT व CVT के मुकाबले सस्ती है, AGS वाली मॉडल उसी कार के मैन्युअल ट्रांसमिशन वाली मॉडल से 50,000 रुपयें अधिक पड़ती है।

कुल मिलाकर मारुति सुजुकी की AGS गियरबॉक्स मैन्युअल गियरबॉक्स के बराबर माइलेज देती है तथा क्लच व गियर शिफ्ट करने की जरुरत भी नहीं पड़ती है। AGS तकनीक वाली आटोमेटिक कार चलाने व मेन्टेन करने में बहुत आसान है तथा मैन्युअल वैरिएंट के मुकाबले अधिक महँगी भी नहीं है और यही कारण है कि देश में अधिकतर लोग मारुति सुजुकी की ऑटोमेटिक कार खरीद रहे है। अधिक जाने के लिए यहां देखें।


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