टेस्टिंग के दौरान स्पॉट हुई मारुति वैगनआर इलेक्ट्रिक
मारुति सुजुकी अपनी पॉपुलर टॉल ब्यॉय हैचबैक कार वैगनआर का नया वर्जन लॉन्च करने वाला है। लेकिन आपको ये भी बता दें कि जल्द ही कंपनी भारत में अपना पहला इलेक्ट्रिक कार भी लॉन्च कर सकती है। मारुति सुजुकी की नई इलेक्ट्रिक कार को भी वैगनआर पर आधारित होगी। इसे टेस्टिग के दौरान स्पॉट किया गया है।

मारुति वैगनाआर इलेक्ट्रिक को सबसे पहले सितंबर 2018 में हुए MOVE समिट में पेश किया गया था। अब इसे दिल्ली की सड़कों पर टेस्टिंग के दौरान स्पाई किया गया है जिससे पता चलता है कि कंपनी इसके लॉन्च की तैयारी कर रही है। लॉन्च से पहले मारुति सुजुकी अपनी अपकमिंग पहली इलेक्ट्रिक हैचबैक कार को देश के हर ड्राइविंग कंडिशन में टेस्ट करना चाहती है।

जो मारुति वैगनआर इलेक्ट्रिक टेस्टिंग के दौरान स्पॉट की गई है उसकी डिजाइन इंटरनेशनल मार्केट में बिक रही सोलियो की तरह है। कुछ समय पहले हमने आपको बताया था कि मारुति ने अपनी वैगनआर इलेक्ट्रिक के 50 प्रोटोटाइप मॉडल को देश के अलग-अलग हिस्सों में टेस्टिंग के लिए एक साथ रवाना किया था। इस दौरान सभी डेटा कलेक्ट किया जाएगा, जो कि आनेवाले समय में कार की बेहतरी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

मारुति वैगनआर इलेक्ट्रिक में 72 वोल्ट का सिस्टम लगा है जो कि 25 किलोवॉट की बैटरी से अपनी पावर लेता है। ये इलेक्ट्रिक वर्जन नए लेटेस्ट जेनरेशन वैगनआर पर बेस्ड होगी और इसे नए प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा। फिलहाल ये प्रोटोटाइप इलेक्ट्रिक वैगनआर HEARTECT प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है जो कि नई स्विफ्ट और डिजायर में भी देखनो को मिला था।

मारुति ने इलेक्ट्रिक वैगनआर की टेस्टिंग की टेस्टिंग करने का जो निर्णय लिया है उससे अन्य कंपनियां भी इस ओर आगे बढ़ेंगी। मारुति सुजुकी देश की सबसे ज्यादा विस्वसनिय और लोकप्रिय कंपनी है। देश में सबसे ज्यादा इसी की कारें बिकती है। ऐसे में यदि इतनी बड़ी और विश्वसनिय कंपनी अगर इलेक्ट्रिक ऑटोमेशन की दिशा में आगे बढ़े और निवेश करे तो इलेक्ट्रिक मोबोलिटी के लिए ये एक सकारात्मक खबर होगी।

हालांकि इलेक्ट्रिक मोबोलिटी में निवेश कर मारुति सुजुकी ने एक बेहद ही समझदारी भरा फैसला लिया है। क्योंकि आनेवाल समय इलेक्ट्रिक वाहनों का ही होने वाला है। पुरी दुनिया इसकी ओर तेजी से बढ़ रही है पर भारत अभी इसमें थोड़ा पीछे है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अभी कोई साफ निती नहीं है और इंफ्रास्ट्रक्चर भी कमजोर है। हालांकि भारत सरकार अब इस दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है और धीरे-धीरे इसका असर भी दिख रहा है। कई बड़े ऑटो कंपनियों ने अब भारत के ईवी क्षेत्र में निवेश करने का निर्णय लिया है।


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