परिवहन मंत्री की फॉर्च्यूनर ने तोड़ा ट्रैफिक सिग्नल, पुलिस ने काटा चालान
कानून बानाने वाले ही जब कानून तोड़ने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि देश कहा जा रहा है। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों कहा जा रहा है। इससे पहले हम आपको बता दे कि कुछ ही दिन पहले देश की संसद में मोटर व्हीकल एक्ट को पास कराया गया था।

देश के परिवहन मंत्री नितीन गडकरी ने राज्यों के साथ मिलकर संसोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करने का निश्चय किया था। जिस हौसले और उत्साह के साथ नितीन गडकरी प्रेस वार्ता के दौरान मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के बारे में बता रहे थे, उसे सुनकर यही लग रहा था कि देश की यातायात व्यवस्था में सुधार तो जरूर आएगा।

लेकिन नितीन गडकरी की सारी योजना वही गड्डे में गिर जाती है, जब उनके ही पार्टी के मंत्री यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते है। हम बात कर रहे है झारखंड राज्य के परिवहन मंत्री सीपी सिंह की। दरअसल घटना इस प्रकार है कि झारखंड के परिवहन मंत्री इतने खुद को कानून से ऊपर समझते है।

ऐसा समझना भी चाहिए, क्योंकि वो तो खुद परिवहन मंत्री है। उन्हें क्यों यातायात नियम पालन करना चाहिए। भारत जैसे देश में कोई मंत्री या विधायक के लिए तो कानून होते नहीं है।

भारत में तो कानून सिर्फ आम लोगों के लिए बनाए और लागू किए जाते है। यह सब इतना साफ तो है, मंत्रीजी की टोयोटा ने सिंग्नल ही तोड़ा है। इतनी छोटी-सी बात को बिना वजह तूल दे रहे है।

आपको बता दें कि यह घटना रांची में हुई, जो झारखंड की राजधानी है। मंत्रीजी के वाहन ने एक व्यस्त मार्ग पर एक लाल ट्रैफ़िक सिग्नल को तोड़ दिया है। इसके बाद सीसीटीवी कैमरों ने वाहन को पकड़ा और उसके आधिकारिक पते पर जुर्माना भेजा गया है।

जिस वाहन का चालान किया गया है, वो मंत्री द्वारा उपयोग की जाने वाली टोयोटा फॉर्च्यूनर एक आधिकारिक वाहन है, जो राज्य द्वारा उसे अपने कर्तव्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए प्रदान की जाती है। यह घटना 23 जून को अपराह्न लगभग 3:46 बजे एमजी रोड के पास सर्जना चौक पर हुई है। हालांकि वाहन को जब्त भी कर लिया गया है।

लेकिन इसके बाद की घटना और भी मजेदार है। आपको यह जान कर खुशी होगी कि मंत्रीजी को केवल 100 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं इस पर बात करते हुए सीपी सिंह के अनुसार, जुर्माना अब चुका दिया गया है और उन्होंने अपने सहायक को इसे जल्द से जल्द करने को कहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी जेब से जुर्माना भरा और इस मामले को बंद करना चाहते थे, यही वजह है कि उन्होंने इसे अपने दम पर देने का फैसला किया। सीपी सिंह ने कहा कि अगर वह घटना के समय वाहन के अंदर बैठा होते, तो यह घटना होती ही नहीं।

सीपी सिंह ने यह भी कहा कि यदि सरकार चाहती है कि लोग कानूनों का पालन करें, तो अधिकारियों को नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने पूर्व में भी जुर्माना अदा किया है।

यह दिलचस्प बात यह है कि मंत्री ने ट्रैफिक कांस्टेबलों को उल्लंघनकर्ताओं का पीछा करते हुए देखने के बाद स्वचालित नंबरप्लेट रीडर की शुरुआत की है। उनका मानना है कि इस तरह के पीछा से दुर्घटनाएं हो सकती हैं, यही वजह है कि इस तरह के स्वचालन की आवश्यकता थी।


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