शराब पीने और सीट बेल्ट न लगाने पर चालू नहीं होगी गाड़ी, भारतीय सेना ने इजात किया कमाल का उपकरण
इंडियन आर्मी ने अपने वाहनों के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो ड्रंक ड्राइविंग और सीट बेल्ट न पहनने को जांचता है। आर्मी कैप्टन ओंकार काले और उनकी टीम ने इस इंटीग्रेटेड व्हीकल सेफ्टी सिस्टम को बनाया है।

कैप्टन ओंकार के अनुसार अगर कोई व्यक्ति शराब पीकर या बिना सीट बेल्ट लगाए वाहन को स्टार्ट करता है तो ये सिस्टम वाहन को स्टार्ट नहीं होने देता है। इस सिस्टम को सेना में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तैयार किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि इंटीग्रेटेड व्हीकल सेफ्टी सिस्टम का इस्तेमाल जबलपुर व्हीकल फैक्ट्री निर्मित भारतीय सेना के ट्रकों में किया गया था और यह पूरी तरह से सफल साबित हुआ है।

पश्चिमी देशों की बात करें तो उन्होंने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जो चालक द्वारा शराब के सेवन की जांच के साथ गाड़ी चलाते समय अगर चालक का ध्यान भटकता है तो उसे सचेत करती है।

उत्तराखंड रेजिडेंशियल यूनिवर्सिटी में अल्मोड़ा और हल्दवानी की आरआई इस्ट्रूमेंट्स एंड इनोवेशन इंडिया ने मिलकर ऐसी डिवाइस तैयार की थी, जो चालक को उस समय वाहन चलाने में कठिनाई पैदा करती है, जब चालक सुस्त अवस्था में हो या मोबाइल पर बात कर रहा हो।

खोजकर्ताओं की टीम ने इस डिवाइस को बेकार हुई चीजों से निकले ग्राफीन और जंगली घास की मदद से बनाया था। ग्राफीन इस डिवाइस में सबसे अहम किरदार निभाता है।

जब कोई चालक वाहन की ड्राइविंग सीट पर बैठता है तो उसे इस डिवाइस में फूंकना होता है। चालक की फूंक से इस डिवाइस के सेंसर इस बात का अंदाजा लगाते है कि चालक के खून में एल्कोहल की कितनी मात्रा है।

शराब की मात्रा मोटर वाहन एक्ट के तहत तय किये गए मानकों से अधिक होने पर सेंसर वाहन को स्टार्ट नहीं होने देते है। अगर चालक किसी और से इस डिवाइस में फूंकवाता है तो इस डिवाइस के ग्राफीन कोटेड सेंसर सक्रिय हो जाते हैं और वाहन को स्टार्ट नहीं होने देते है।

इसके साथ ही अगर चालक को गाड़ी चलाते हुए नींद आती है तो इसमें मौजूद ऑब्जेक्ट और इमेजिंग मॉड्यूल सेंसर साथी यात्री को इसका संकेत दे देते है। ये सेंसर उस समय भी काम करते है, जब चालक मोबाइल पर बात कर रहा होता है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
भारतीय सेना द्वारा इसे डिवाइस को वाहनों में लगाया जाएगा। लेकिन भारत में हर रोज सड़क हादसों में सैकड़ों लोगों की जान जाती है। इनमें से बहुत से हादसे शराब पीकर वाहन चलाने ने होते है। अगर इस डिवाइस को वाहन निर्माताओं के साथ साझा करके सभी वाहनों में लगाना अनिवार्य कर दिया जाए तो इन हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।


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