क्रैश टेस्ट में हुंडई कोना रही अव्वल, बनी सबसे सुरक्षित इलेक्ट्रिक कार
हुंडई कोना पहली इलेक्ट्रिक कार है जिसका क्रैश टेस्ट ऑस्ट्रेलिया में किया गया है। हुंडई कोना इलेक्ट्रिक का मूल्यांकन क्रैश टेस्ट करने वाली ऑस्ट्रेलियाई संस्था एएनसीएपी (ऑस्ट्रेलियन न्यू कार असेस्मेंट प्रोग्राम) द्वारा की गई है।

एएनसीएपी दुनिया भर की कारों का क्रैश टेस्ट करने के बाद उनकी क्वालिटी, मजबूती और सुरक्षा पर मूल्यांकन कर रेटिंग पॉइंट या स्टार निर्धारित करती है। हुंडई कोना इलेक्ट्रिक कार ने क्रैश टेस्ट को पास करते हुए 5 में से 5 स्टार स्कोर किए हैं।

यही नहीं हुंडई कोना इलेक्ट्रिक ने कोना के पेट्रोल वेरिएंट से बेहतर प्रदर्शन किया है। हुंडई कोना पेट्रोल ने क्रैश टेस्ट में 16 में से 14.07 स्कोर किया था जबकि इस साल इलेक्ट्रिक वेरिएंट ने 14.97 स्कोर किया है।

इसके एक दिन पहले ही हुंडई सैंट्रो ने ग्लोबल एनसीएपी क्रैश टेस्ट में बेहद खराब प्रदर्शन करते हुए 2 स्टार स्कोर किया था।

भारत में हुंडई कोना की कीमत 25.30 लाख रुपये है जिसे कॉर्पोरेट टैक्स में छूट के बाद घटा कर 23.71 लाख रुपये (एक्स -शोरूम) कर दिया गया है। फिलहाल, देश में कोना इलेक्ट्रिक के फीचर्स का मुकाबला करने वाली कोई कार नहीं है लेकिन बहुत जल्द एमजी मोटर्स अपनी इलेक्ट्रिक कार भारत में लॉन्च करेगी जो कोना को टक्कर दे सकती है।

बता दें कि एनसीएपी द्वारा सभी कारों का क्रैश टेस्ट 65 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर किया जाता है। टेस्ट में दुर्घटना को वास्तविक रूप देने के लिए सामान्य वजन वाली किसी अन्य कार से टक्कर की जाती है।

हुंडई इस कार को बहार के देशों से मंगा रही है। भारत में इस कार को असेम्ब्ल कर बेचा जा रहा है। हुंडई का दावा है कि कोना इलेक्ट्रिक कार 452 किलोमीटर चल सकती है।

इस कार में 39.2 किलोवाटऑवर की बैटरी लगाई गई है जो फास्ट चार्जर से 57 मिनट में 80 प्रतिशत तक चार्ज हो जाती है। कार का इलेक्ट्रिक मोटर 136 पीएस की पॉवर और 395 एनएम का टॉर्क देता है।

भारतीय कारों में हुंडई सैंट्रो के अलावा मारुती सुजुकी वैगनआर, अर्टिगा, डैटसन रेडीगो और टाटा नेक्सॉन की भी टेस्टिंग की गई है। इनमे से सिर्फ टाटा नेक्सॉन ही 5 स्टार लाने में कामयाब हो पाई है।

मारुती सुजुकी वैगनआर और अर्टिगा को 2 स्टार मिले हैं जबकि डैटसन रेडीगो को सिर्फ 1 स्टार लाकर सबसे खराब प्रदर्शन वाली कार रही। यह टेस्ट भारतीय कारों में एबीएस, सीटबेल्ट रिमाइंडर, स्पीड अलार्म और एयरबैग को अनिवार्य करने के बाद किया गया है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
एबीएस और एयर बैग को अनिवार्य करने के बाद भी अधिकतर भारतीय कारें इस टेस्ट में फिस्सडी साबित हुईं हैं। इससे पहले भी भारत में बिकने वाली पॉपुलर कार और एसयूवी मॉडल ग्लोबल एनसीएपी टेस्ट में विफल हुए हैं।


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