फ्लिपकार्ट 2020 तक डिलीवरी के लिए करेगा 40% इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग
फ्लिपकार्ट ने डिलीवरी के लिए उपयोग में आने वाले वाहनों को बदलने की घोषणा किया है। फ्लिपकार्ट की योजना डिलीवरी के उपयोग में आने वाली सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने की है। कंपनी ने दावा किया है कि 2020 तक डिलीवरी के लिए उपयोग में आने वाले 40 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन से बदल देगी।

आपको बता दें कि यह फ्लिपकार्ट द्वारा उठाया गया अब तक का सबसे बड़ा कदम है। फ्लिपकार्ट ने इस बारे में कहा है कि "पर्यावरण सुरक्षा के लिए हम अपने इस्तेमाल में आने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में अपडेट करने जा रहे है। इलेक्ट्रिक वाहन पर स्विच होकर हम प्रदूषण को कम करने में अपनी भागीदारी देना चाहता है।

"हमें उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक वाहन प्रदूषण को पर्यावरण से कम करेगी, जो वर्तमान में चलने वाली डीजल और पेट्रोल वाले ईंधन से ज्यादा फैलता है। फ्लिपकार्ट का यह कदम न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में लिया गया है, बल्कि इससे फ्लिपकार्ट बाकि कंपनियों को भी इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। साथ ही इससे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्योग में भी वृद्धि होगी और विकास को बढ़ावा मिलेगा।"

फ्लिपकार्ट ने 6 महीने तक इलेक्ट्रिक वाहनों के वितरण पर टेस्टिंग किया था। इस टेस्टिंग के दौरान सभी इलेक्ट्रिक वाहन के परिणाम फ्लिपकार्ट के डिलीवरी मापदंडो के अनूकुल आए है। इस टेस्टिंग के दौरान फ्लिपकार्ट ने दिल्ली में 10 इलेक्ट्रिक वैन, हैदराबाद में 8 और बैंगलोर में 30 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का इस्तेमाल किया।

टेस्टिंग के दैरान जो समस्या सामने आ रही है थी , वो इसको चार्ज करने की है। इससे निपटने के लिए फ्लिपकार्ट ने देश भर में फैले डिलीवरी हब पर अधिक से अधिक चार्जिंग प्वॉंइट स्थापित कर समस्या से निपटने का फैसला किया है।

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इस परीक्षण के बाद फ्लिपकार्ट ने पाया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाने से ईंधन की लागत में बड़े प्रतिशत में कमी आई है। इसलिए फ्लिपकार्ट की योजना इलेक्ट्रिक व्हीकल को 2020 से पहले उपयोग में लाने की है। फ्लिपकार्ट पहले चरण में लगभग 160 इलेक्ट्रिक वैन खरीदने की योजना पर भी काम कर रही है।

फ्लिपकार्ट ई-कॉमर्स में ही नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। अगर फ्लिपकार्ट इतने अधिक संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करती है, तो इससे आम लोगों के बीच भी इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बड़ा संदेश जाएगा। क्योंकि देखा जाए तो अभी भी इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच आम लोगों से बहुत दूर है, जिसके कई कारण है।

सबसे पहले तो इसकी लागत है। इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत पेट्रोल और डीजल इंजन वाले वाहनों के मुकाबले कही अधिक है। वहीं दूसरी ओर से इसके चार्जिंग के लिए बुनियादी ढांचे की कमी भी है। इन सारी समस्याओं का फिलहाल तो कोई समाधान नहीं दिख रहा है। लेकिन सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास को लेकर लगातार कोशिश कर रही है। अब यह देखा जाना चाहिए कि भविष्य में चीजें कैसे बदलती है।


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