यह पांच कंपनियां बंद कर रहीं हैं डीजल कार का निर्माण, जानें क्या है कारण
देश की पांच बड़ी वाहन निर्माता कंपनियां अब डीजल कार बनाना बंद कर रहीं हैं। मारुती सुजूकी, टाटा, स्कोडा, निसान और फॉक्सवैगन जैसी बड़ी कार कंपनियां अब डीजल करों का उत्पादन बंद कर रहीं हैं।

मारुति सुजुकी
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी का कहना है कि पेट्रोल इंजन को अपग्रेड करने से ज्यादा खर्च डीजल इंजन को अपग्रेड करने में आता है, इस तरह डीजल इंजन को बीएस-6 मानकों के मुताबिक अपग्रेड करना घाटे का सौदा है।

भारत में डीजल इंजन कारों की बिक्री वित्तीय वर्ष 2019 के अंत तक 19 प्रतिशत घट चुकी है। ये डीजल कारों के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

निसान
जापानी ऑटो कंपनी निसान ने भी डीजल इंजन वाली गाड़ियों को बंद करने की घोषणा की है। कंपनी अब डीजल इंजन के विकास पर काम नहीं कर रही है।

कार निर्माता रेनॉल्ट का कहना है कि सिर्फ भारत में ही नहीं विदेशों में भी डीजल कारों की बिक्री में गिरावट देखने को मिल रही है। यूरोप में यूरो-7 उत्सर्जन मानक के लागू होने के बाद डीजल कारों की बिक्री लगातार घट रही है।

स्कोडा
स्कोडा का भी कहना है कि कंपनी आने वाले दिनों में रैपिड के डीजल इंजन वेरिएंट को बंद करने जा रही है। कंपनी ने इसके लिए डीजल इंजन को अपग्रेड करने में बढ़ी लागत का हवाला दिया है।

फॉक्सवैगन
फॉक्सवैगन का कहना है कि कंपनी पोलो, वेंटो जैसे डीजल इंजन कारों का उत्पादन अगले साल से बंद कर रही है। फॉक्सवैगन का ये भी कहना है कि साल 2026 से कंपनी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले इंजन का निर्माण बंद करेगी और पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास पर काम करेगी।

टाटा मोटर्स
टाटा मोटर्स का भी कहना है कि देश में बीएस-6 मानकों के लागू होने के बाद डीजल इंजन मॉडलों को बनाना फायदे का सौदा नहीं होगा। खासकर छोटी डीजल इंजन कारों में कंपनी को नुकसान उठाना पड़ सकता हैं।

ड्राइवस्पार्क के विचार
देश में अप्रैल 2020 से बीएस-6 उत्सर्जन मानक आधिकारिक रूप से लागू हो रहे हैं। दूसरी तरफ कार कंपनियों के लिए अब डीजल इंजन मुनाफे का सौदा नहीं रहा। देश की सभी बड़ी ऑटो कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण तथा विकास पर ज्यादा ध्यान दे रहीं हैं। यह देखने वाली बात होगी कि ऑटोमोबाइल सेक्टर को इस कदम से कितनी राहत मिलती है।


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