फास्टटैग टोल पेमेंट नवंबर 2019 से होंगे अनिवार्य, जानिये क्या है तथा कैसे करता है काम
भारत में टोल प्लाजा को लेकर लोगो की अक्सर यह शिकायत रहती है कि इसे पार करने में बहुत अधिक समय लगता है, लेकिन अब जल्द ही यह खत्म होने वाला है, इसके लिए सरकार ने नया रास्ता निकाल लिया है।

भारतीय सरकार अब टोल देने वाली सभी वाहनों में फास्टटैग को अनिवार्य करने वाली है, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसे चार महीने में पूर्ण करने की बात कही है। यह कदम सरकार द्वारा टोल प्लाजा पर ट्रैफिक को कम करने के लिए उठाया है।

साथ ही परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश के सभी टोल कलेक्शन करने वाली जगहों पर फास्टटैग को स्वीकार करने वाली सिस्टम लगा दिया जाएगा, भारत में वर्तमान में इनकी संख्या 500 से अधिक है। यह टोल टैक्स के कारण हाईवे पर लगने वाले जाम को कम करने में मददगार साबित होगा।

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि "चार महीनों के भीतर देश के सभी टोल प्लाजा फास्टटैग को स्वीकार करने वाले बना दिए जाएंगे तथा किसी भी व्यक्ति को टोल प्लाजा में नहीं रुकना पड़ेगा। हमनें अब तक 58 लाख फास्टटैग बांट दिए है।"

भारत में वर्तमान में करीब फास्टटैग टोल वाले करीब 450 राजकीय व राष्ट्रीय हाईवे है तथा उनसे गुजरने के लिए नवंबर 2019 से फास्टटैग अनिवार्य हो जाएगा। नई कारों में यह टैग पहले से लगे हुए लेकिन पुरानी कारों में यह जल्द से जल्द लगाए जाने है, इनके बिना टोल प्लाजा को पार नहीं किया जा सकेगा।

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फास्टटैग क्या है?
भारत में टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम को कम करने के लिए देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम लाया गया है। फास्टटैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है जो टोल प्लाजा से गुजने पर अपने आप ही टोल काट लेता है। इसे भारत में सबसे पहले 2014 में लाया गया था।

भारत में धीरे धीरे इसे सभी जगह पर लागू किया जा रहा है तथा आगामी 4 महीनों में इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। इसकी सुविधा से आपको किसी भी टोल प्लाजा से गुजरते समय लाइन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

फास्टटैग कार्य कैसे करता है?
फास्टटैग को वाहन के विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है, इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन लगा होता है। टोल प्लाजा के पास पहुँचते ही यह रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन वहां लगे सेंसर के संपर्क में आता है और वहां लगने वाले शुल्क को काट लेता है।

फास्टटैग एक प्रीपेड खाते से जुड़ा होता है तथा राशि वही से काटी जाती है, इसमें राशि खत्म होने के बाद इसे पुनः रिचार्ज कराना पड़ता है। वाहन में लगे फास्टटैग की वैधता 5 साल की होती है, इसके बाद आपको वाहन में नया फास्टटैग लगाना पड़ेगा।

ड्राइवस्पार्क के विचार
फास्टटैग टोल कलेक्शन का एक आसान व सुगम साधन है तथा यह समय की बचत करता है। भारत में कई जगहों पर यह शुरू भी हो चुका है, आने वाले 4 महीनों में यह अनिवार्य भी कर दिया जाएगा। फास्टटैग अक्सर हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बहुत फायदेमंद है।


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