कारों में अब लगेंगे फ्यूल के हिसाब से स्टीकर, सरकार ने दिया आदेश
भारत में पिछले कुछ वक्त से वाहनों पर रंगीन स्टीकर लगाने की बात लगातार उठ रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने रोड ट्रांसपोर्ट और परिवहन विभाग को यह निर्देश दिया है कि वाहनों पर होलोग्राम आधारित रंगीन स्टीकर का प्रयोग किया जाना चाहिए।

यह व्यवस्था फिलहाल नई कारों के लिए लागू की जाएगी। इससे पता चल पाएगा की वाहनों में कौन सा ईंधन इस्तेमाल किया जाता है। हल्के नीले रंग के होलोग्राम स्टीकरों का प्रयोग पेट्रोल और सीएनजी से चलने वाली कारों के लिए किया जाएगा। वहीं नारंगी रंग के होलोग्राम आधारित स्टीकर डीजल वाहनों के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में बढ़ते प्रदूषण स्तर को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के परिवहन विभाग को यह निर्देश दिया है कि रंगीन होलोग्राम आधारित स्टीकरों का इस्तेमाल जल्द से जल्द किया जाए। हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों में हरे रंग की नंबर प्लेट वाली स्टीकर लगी ही होती है।

हालांकि कई लोगों में इसे लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है कि वाहनों पर स्टीकर का उपयोग क्यों किया जाना चाहिए या नहीं? इससे भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। वही जब बहुत सारे वाहन निर्माताओं ने भी वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के बारे में सूचित करना बंद कर दिया है। साथ ही इससे पेट्रोल पंप पर कर्मचारियों के साथ पहली बार कार चलाने वाले व्यक्तियों को भी कठिनाई हो सकती है।

होलोग्राम स्टीकर अनिवार्य रूप से अंदर की तरफ विंडशील्ड के नीचे-बाईं ओर स्थित एक तीसरा पंजीकरण प्लेट है। यह पंजीकरण संख्या, पंजीकरण प्राधिकरण, लेजर-ब्रांडेड पिन, इंजन और चेसिस नंबर जैसे विवरणों को बतलाता है।

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इस पर और ज्यादा जानकारी देते हुए भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव प्रियांका भारती ने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा कि "भारत में कई तरह के वाहन मौजूद है, जिनमें बीएस - 4 से पहले के वाहन भी शामिल है, साथ ही बीएस 4 और अब बीएस 6 भी शामिल है।"

"इन सभी वाहनों में ज्यादातर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, इथेनॉल, मेथनॉल और इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध है। इसलिए इन सभी प्रकार के संरचनाओं के लिए स्टीकर प्रणाली को लागू करना आवश्यक है।"

आपको बता दें कि यह प्रक्रिया पिछले वर्ष से ही चल रही है। पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देश दिया था कि सभी वाहनों को कलर- कोडेड होलोग्राम स्टीकर के साथ जारी किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के पीछे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को प्रतिबंधित करना था।

साथ ही ऐसे वाहन जिन्हें पहले से ही अस्थायी या स्थायी रूप से प्रदूषित माना गया है उनकी पहचान कर हटाया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे सरकार को दिल्ली-एनसीआर में अक्टूबर 2018 से ही शुरू करने का आदेश दिया था। लेकिन इस व्यवस्था के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर पूरी तरह तैयार नहीं हो पाने की वजह से यह शुरू नहीं हो किया जा सका था।


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