ऑटो जगत में मंदी को देखते हुए सरकार ने लिया बड़ा कदम, इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने में नहीं करेगी जल्दी

भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को देश में बढ़ावा देने के लिए योजनाओं पर काम कर रही है। हाल के दिनों में ही सरकार द्वारा कई बड़ी घोषणाएं की गई है। इनमें सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दर को 12 से 5 प्रतिशत तक कम कर दिया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अब कोई समय सीमा नहीं

साथ ही ऑटो निर्माताओं को भी यह निर्देशित किया है कि वो इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ग्राहकों को प्रोत्साहित करें। सरकार के इस फैसले का ऑटोमोबाइल उद्योग ने भी स्वागत किया है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में इसके बाद तेजी भी देखी गई है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अब कोई समय सीमा नहीं

भारत में मौजूद कई ऑटो कार निर्माताओं ने इलेक्ट्रिक कार उत्पादों को भारतीय बाजार में उतारा है। इन उत्पादों को भारतीय ग्रहाकों को द्वारा भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अब कोई समय सीमा नहीं

लेकिन ऑटोमोबाइल उद्योग का एक तबका ऐसा भी है, जिसे लगता है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने का फैसला बहुत जल्दबाजी में लिया गया है। आपको बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में आईसी इंजन और बैटरी से चलने वाले वाहनों पर अपनी राय प्रकट की थी।

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इसके बाद से देश में 2023 से आईसी इंजन वाले तीन पहियों की बिक्री को रोकने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके साथ ही 150 सीसी के इंजन में इस इंजन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि इस पर विवाद भी उत्पन्न हुआ था।

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इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि केंद्र सरकार की योजना जीवाश्म ईंधनो से हटकर इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने की है। ये देश के विकास में तेजी से बढ़ोत्तरी करेगी। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि देश के विकास में ऑटो उद्योग की भूमिका रोजगार और जीडीपी के लिए महत्वपूर्ण है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अब कोई समय सीमा नहीं

वहीं ईवीएस को बढ़ावा देने वाली सरकारी संगठनों ने कंपनियों को पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों के उत्पादन में कमी लाने को कहा है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहने के नए खरीदारों के लिए पंजीकरण शुल्क में राहत देने का भी निर्णय लिया है। वहीं पेट्रोल-डीजल से संचालित वाहनों के पंजीकरण शुल्क में बढ़ोत्तरी कर दी गई है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अब कोई समय सीमा नहीं

हालांकि बढ़ायी गई पंजीकरण शुल्क को लेकर ऑटो कंपनियों ने चिंता जाहिर की है। भारत के विभिन्न ऑटो निर्माताओं के प्रतिनिधियों ने पंजीकरण शुल्क में प्रस्ताविक वृद्धि पर निर्मला सीतारमण (वित्त मंत्री) और उद्योग मंत्री अरविंद सांवत के साथ बैठक की है।

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आपको बता दें कि सड़क और परिवहन मंत्रालय द्वारा हाल ही में आईसी इंजन वाले वाहनों पर पंजीकरण शुल्क में 5,000 रुपये की राशि को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अब कोई समय सीमा नहीं

लेकिन इस बैठक के बाद सरकार ने पंजकीरण शुल्क में की गई बढ़ोत्तरी पर रोक लगा दिया है। साथ ही सियाम ने भी इसपर 1 अप्रेल 2020 के बाद से बीएस-6 वाहनों के पंजीकरण की अनुमति देने की मांग की है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अब कोई समय सीमा नहीं

इससे ऑटो निर्माताओं को मार्च 2020 तक अपने वर्तमान उत्पादों को बिक्री करने के लिए समय में मिल जाएगा। वहीं सुप्रीण कोर्ट द्वारा भी पंजीकरण शुल्क में बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दिया गया है।

Article Published On: Wednesday, August 21, 2019, 16:46 [IST]
English summary
Indian govt has not set deadline to launch electric vehicles. Read In Hindi.
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