ट्रांसपोर्ट विभाग ने रद्द किया 14 डीलरों का सर्टिफिकेट, नहीं चला रहे थे प्रदूषण जांच केंद्र
दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग ने दंडात्मक करवाई करते हुए शुक्रवार को 14 डीलरों का ट्रेड लाइसेंस ससपेंड कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह डीलर अपने डीलरशिप में प्रदूषण जांच केंद्र (पीयूसी) नहीं चला रहे थे।

लाइसेंस रद्द होने के वहज से यह डीलर अब दो महीनों तक किसी भी वाहन की बिक्री नहीं कर पाएंगे। ट्रांसपोर्ट विभाग डीलरों को वाहन बेंचने के लिए ट्रेड सर्टिफिकेट देती है। यह एक लाइसेंस के तौर पर काम करता है।

हालांकि अधिकारीयों ने कहा है कि अगर डीलरशिप इस अवधि के दौरान प्रदूषण जांच केंद्र चालू कर देते हैं तो उनसे जुर्माना वसूल कर लइसेंस लौटा दिया जाएगा।

बगैर ट्रेड सर्टिफिकेट के किसी भी डीलर को वाहन बेचने की अनुमति नहीं होती है। किसी भी वाहन की डीलरशिप लेने के लिए प्रदुषण जांच केंद्र खोलने की अनिवार्यता होती है।

यह जांच केंद्र डीलरशिप के अंदर ही होते हैं, जहां वाहनों का उत्सर्जन परीक्षण किया जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में प्रतिदिन 30 से 35 हजार वाहन उत्सर्जन परीक्षण के लिए प्रदुषण जांच केंद्र पहुंचते हैं।

दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग के अंतर्गत 43 प्रदूषण जांच केंद्र चलाये जा रहे हैं। इन जांच केंद्रों में वाहन के धुंए में कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और अन्य वायु प्रदूषकों के उत्सर्जन के लिए वाहनों की जांच की जाती है।

परीक्षण के आधार पर, उत्सर्जन और प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों को पूरा करने वाले वाहनों को प्रमाणित करने के लिए एक पीयूसी प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

संशोधित मोटर वाहन अधिनियम 2019 के तहत बगैर पीयूसी सर्टिफिकेट के वाहन पर 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जबकि इसके बाद उल्लंघन करने पर 10,000 रुपये तक अत्यधिक जुर्माना वसूल किया जा सकता है।

ड्राइवस्पार्क के विचार
1 सितंबर से नए मोटर वाहन अधिनियम लागू होने के बाद उत्सर्जन प्रमाण लेने वालों की भीड़ कई गुना बढ़ गई है। इसको देखते हुए दिल्ली प्रसाशन ने वाहन डीलरों को डीलरशिप में ही प्रदूषण जांच केंद्र खोलने के निर्देश दिए थे।

जांच केंद्र वाहनों में कार्बन उत्सर्जन को मापने में काफी मदद करते हैं, इसके अनुसार वाहन मालिक अपने वाहन जरूरी बदलाव कर उत्सर्जन को नियंत्रित कर सकते हैं।


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