ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा जैसे हल्के वाहन चलाने के लिए अब कमर्शियल लाइसेंस की जरूरत नहीं
केंद्र सरकार की तरफ से एक बड़ा फैसला आया है। लोगों को राहत देते हुए सरकार ने 7,500 किलो या इससे कम वजन के वाहनों को चलाने के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी है। सरकार के इस निर्णय से ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत राहत मिलने वाली है।

सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस संदर्भ में राज्यों को एक एडवाइजरी जारी कर सुप्रीम कोर्ट के 2017 के आदेश का पालन करने को कहा है। अब प्राइवेट ड्राइविंग लाइसेंस के आधार पर कोई भी व्यक्ति टैक्सी, थ्री-व्हीलर्स, ई-रिक्शा और फूड डिलिवरी के लिए टू व्हीलर चला सकता है।

हालांकि ट्रक,बस और अन्य हैवी कमर्शियल वाहनों को चलाने के लिए पहले की तरह कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस लेना होगा। बता दें कि सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने के लिए आदेश दिया था।

इससे पहले पैसेंजर व्हीकल हो या फिर हल्के व भारी कमर्शियल वाहन उसे चलाने के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत रहती थी। कमर्शियल लाइसेंस पहले एक साल पर्सनल डीएल बनने के बाद ही बनावाया जा सकता था।

सरकार के इस निर्णय के बाद अब कमर्शियल वाहन चलाने के लिए अलग से किसी भी तरह के लाइसेंस बनाने की जरूरत नहीं है। राज्यों को कहा गया है कि परिवहन विभाग आरटीओ ऑफिस के साथ एनफोर्समेंट टीम को भी इसकी जानकारी दे। इसे जल्द से जल्द लागू कराने की व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्होंने आशा जताई है कि राज्य सरकारों को भी अब कमर्शियल लाइसेंस के लिए अलग से बैज देना बंद कर देना चाहिए।

कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म कर सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाया है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। इसके साथ ही कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को सालों इंतजार करना पड़ता था। इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार भी देखने को मिलता था।

हालांकि सरकार के इस फैसले पर लोगों का एक तर्क ये भी है कि इससे सड़कों पर गाड़ियों कि संख्या बढ़ जाएगी और प्रदूषण भी बढ़ेगा। लेकिन अगर लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल अधिक करेंगे तो सड़कों पर प्राइवेट गाड़ियों कि संख्या कम होगी।


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