दिव्यांगों के लिए जगुआर ला रही है अनोखी तकनीक
दुनिया भर में एक से बढ़कर एक शानदार कारों को पेश करने वाली ब्रिटेन की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी जगुआर दिव्यांग (ब्लाइंड) लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अनोखी तकनीक लेकर आ रही है।
सड़क पर आपने कई बार ऐसा देखा होगा कि कोई दिव्यांग (ब्लाइंड) व्यक्ति सड़क पार करता है। उस दौरान आपके जेहन में एक सहानुभूति और उत्सुकता दोनों ही आती है कि आखिर बिना आखों के ये व्यक्ति सड़क कैसे पार करेगा। कई बार ऐसा होता है कि उस व्यक्ति की मदद के लिए कुछ लोग सहयोग के लिए आगे आ जाते हैं लेकिन ऐसा हर बार हो ये जरुरी भी नहीं है। ऐसे समय में ये दिव्यांग (ब्लाइंड) लोग अपने आस पास की मौजूदा स्थिति को आवाज के आधार पर पहचानते हैं। अपने आस पास होने वाले आवाज को ही आधार बनाकर अंधेरी दुनिया में रास्ता तलाशते हैं।

ऐसे मौके पर यदि सड़क पर कोई ऐसा वाहन आता है जो बिलकुल आवाज न करता हो या फिर जिसकी आवाज सुनना संभव ही न हो तो ऐसे दिव्यांग (ब्लाइंड) लोग वाहन की उपस्थिति का अंदाजा भी नहीं लगा सकते है। ऐसा ज्यादातर इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ होता है, क्योंकि उनका इलेक्ट्रिक मोटर बेहद ही कम आवाज करता है। जिसे सुन पाना हर किसी के बस की बात नहीं है। इसी को ध्यान में रखकर एक नई तकनीकी पर काम किया जा रहा है।

दुनिया भर में एक से बढ़कर एक शानदार कारों को पेश करने वाली ब्रिटेन की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी जगुआर दिव्यांग (ब्लाइंड) लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अनोखी तकनीक लेकर आ रही है। इस तकनीक का प्रयोग कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक कारों में करेगी जो कि विशेष प्रकार की ध्वनि निकालेंगे। जो न तो ध्वनि प्रदूषण का कारण बनेंगे और न किसी दूसरे को इस ध्वनि से परेशानी होगी, अलबत्ता इससे दिव्यांग (ब्लाइंड) लोगों को सड़क पर गाड़ी होने का अंदाजा जरूर हो जायेगा।

जगुआर ने अपनी इस तकनीकी को AVAS Sound Warning System का नाम दिया है जिसका प्रयोग कंपनी अपनी आने वाली आई-पेस इलेक्ट्रिक एसयूवी में करेगी। AVAS का मतलब है आॅडिएबल व्हीकल एलर्ट सिस्टम, जिसे कंपनी के विशेष रिसर्च टीम और इंजीनियरों ने तैयार किया है। ये किसी प्रकारका लाउड हॉर्न नहीं होगा। ऐसा माना जा रहा है कि इस तकनीकी का प्रयोग अन्य वाहन निर्माता भी अपने इलेक्ट्रिक वाहनों में बखूबी करेंगे।

ये साउंड उस वक्त निकलेगा जब वाहन की गति तकरीबन 20 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर पहुंचेगी। फिलहाल इसे यूरोपियन नियमों के अनुसार तैयार किया गया है और ये कानूनी रूप आगामी जुलाई 2019 से लागू किया जायेगा।

आपको बता दें कि, इस तकनीकी का बाकायदा परीक्षण भी किया गया है। जिसे युनाइटेड किंगडम की लीडिंग चैरिटी संस्थान गाइड डॉग फॉर ब्लाइंड के सदस्यों द्वारा किया गया है। ये संस्थान दिव्यांग (ब्लाइंड) लोगों के लिए काम करती है। AVAS Sound Warning System आॅटोमोबाइल इंडस्टी और चैरिटी संस्थान के बीच एक नए रिश्ते को भी तैयार कर रहा है, ये एक बेहद ही सराहनीय कार्य है।

इस तकनीकी पर जगुआर के इंजीनियरों ने तकरीबन 4 सालों तक काम किया है जिसके बाद सटीक साउंड ट्रैक को विकसित किया गया है। ये साउंड केवल के कार के बाहरी हिस्से में ही सुनाई देगा।
इस साउंड की मदद से सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति को इस बात की जानकारी मिलेगी कि आस पास कोई वाहन मौजूद है। हालांकि जो लोग स्वस्थ होते हैं और शारीरिक रूप से सक्षम होते हैं उनके लिए भी कई बार इलेक्ट्रिक कारों की धीमी आवाज परेशानी का सबब बन जाती है। ऐसे में जगुआर का ये पहल बेहद ही सराहनीय है।

आखिरकार जगुआर के इंजीनियरों ने इस साउंड को हर तरह के परिस्थिति में टेस्ट किया यहां तक की इसका परीक्षण इको फ्री रूम में भी किया गया। आपको बता दें कि, इसके लिए कार के फ्रंट ग्रील के पीछे एक स्पीकर लगाया गया है जिससे ये ध्वनि निकलती है। ये ध्वनि आप कार के चारो तरफ से सुन सकते हैं और सबसे खास बात ये है कि इसे किसी भी दशा में म्यूट यानि की बंद नहीं किया जा सकता है।

इसमें इस बात का भी ख्याल रखा गया है कि वाहन की गति कितनी है। जैसे जैसे वाहन की गति में बदलाव होगा वैसे ही ध्वनि में भी बदलाव होता रहेगा। यानि की तेज गति के दौरान ये स्पीकर और भी तेज आवाज करेगा जिससे कि सड़क पर पैदल चल रहे लोगों को इसकी आवाज आसानी से सुनाई दे सके। इसके अलावा यदि वाहन को बैक किया जायेगा तो उस वक्त भी ये आवाज निकलेगी हालांकि उस समय इसकी ध्वनि थोड़ी बदली होगी।
जब वाहन अपने अत्यधिक रफ्तार पर होगी उस वक्त ये ध्वनि नहीं होगी क्योंकि उस वक्त कार के पहियों का सड़क पर घर्षण और हवा की रफ्तार ही एक ऐसा ध्वनि उत्पन्न करती है जिससे किसी को भी इस बात का अंदाजा लग जाता है कि आस पास कोई वाहन है।

इस बारे में जगुआर एनवीएच के टेक्निकल स्पेसलिस्ट इयान सफिल्ड ने बताया कि, इस समय इलेक्ट्रिक मोटर इंजन में किसी भी प्रकार की ध्वनि नहीं निकलती है जिसके कारण सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों को खासी परेशानी से दो चार होना पड़ता है। उन्हें इस बात का पता ही नहीं चलता है कि कब एक वाहन उनके इतने नजदीक आ जाता है। विशेषकर ऐसे लोग जो दिव्यांग है जो आंखों से कुछ भी देख पाने में असमर्थ हैं। हमने इसी को ध्यान में रखते हुए इस आॅडिएबल व्हीकल एलर्ट सिस्टम को विकसित किया है। जो कि सड़क पर पैदल चल रहे लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर तैयार किया गया है। हमारी ये लाइफ सेविंग टेक्नोलॉजी कभी भी स्वीच अॅाफ या फिर म्यूट नहीं की जा सकेगी। इसके लिए युनाइटेड किंगडम की लीडिंग चैरिटी संस्थान गाइड डॉग फॉर ब्लाइंड के सदस्यों द्वारा इसका परीक्षण भी किया गया है।

जगुआर आॅडिएबल व्हीकल एलर्ट सिस्टम पर ड्राइवस्पार्क के विचार:
जगुआर की तरफ से की गई इस अनूठी पहल की जितनी भी सराहना की जाये वो कम है। बेशक इस तकनीकी की मदद से सड़क पर चलने वाले पैदल यात्रियों और विशेषकर दिव्यांगों को विशेष मदद मिलेगी। इस तकनीकी का प्रयोग अन्य सभी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों को जरूर करना चाहिए। ताकि सड़क पर किसी भी मासूम की जिंदगी खतरे में न पड़े। हालांकि इस कार्य के लिए दुनिया भर की कई समाज सेवी संस्थाओ ने आवाज उठाई थी लेकिन उनकी इस आवाज को सबसे पहले जगुआर ने सुना और ऐसी बेहतरीन तकनीकी को इजाद किया।


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