सेकेंड हैंड कार खरीदना चाहते हैं तो आपको ये बातें जरूर जाननी चाहिए
भारत में मध्यम वर्ग के साथ ही ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री भी काफी तेजी से विकसित हो रहा है और इसके साथ ही विकसित हो रहा है सेकेंड हैंड कारों का बाजार। बाजार में रोज नए-नए मॉडल लॉन्च हो रहे हैं। कई लोग साल, दो साल, तीन साल में ही अपनी कारों से बोर हो जाते हैं या फिर किसी अन्य कारण वश उन्हें अपनी कार बेचनी पड़ती है।

कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें नई कार तो खरीदनी होती है पर उनके पास उतना बजट नहीं है। कई बार नौसिखिये लोग नई कार की बजाए पहले सेकेंड हैंड कार खरीदना पसंद करते है। लेकिन सेकेंड हैंड कार खरीदने में कई सावधानियां बरतनी आवश्यक है, नहीं तो पैसों के नुकसान के साथ-साथ कई अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आइये देखते हैं की पुरानी या फिर सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरुरी है।

रिसर्च करें
सबसे पहले तो अपना बजट बनायें और अपनी जरूरत अनुसार पता करें कि उस रेंज में बेस्ट कार कौन सी है। कार मॉडल सेलेक्ट करने के बाद उसके बारे में जितनी संभव हो उतनी जानकारियां इकट्ठा करें।

आप मैग्जीन, वेबसाइट, न्यूज पेपर्स इत्यादि का सहारा ले सकते हैं। इसमें मुख्य रूप से आपको मार्केट में कार की वर्तमान कीमत और लॉन्च कीमत पता करलें। इसके अलावा कोशिश करें कि एक मॉडल ऑप्शन के रूप में भी साथ लेकर चलें।

मेंटेनेंस का ख्याल
ऐसी कंपनियों की कार जिसके स्पेयर पार्ट्स आसानी से नहीं मिलते हों, नहीं खरीदनी चाहिए। यह भी देख लेना चाहिए कि जिस कंपनी की कार आप ले रहे हैं, उसके सर्विस सेंटर ज्यादातर जगहों पर हैं या नहीं।

मिलने से पहले कार ओनर से करें बात
यदि आपने ऑनलाइन माध्यम से कार पसंद की है तो कार ओनर से मिलने से पहले कुछ सवाल अवश्य पुछ लें: जैसे कि कार किस कंडीशन में है, कार कितने किलोमीटर चली है और किन कंडिशन्स में चली है, कार की बॉडी पार्ट और इंटीरियर किस कंडीशन में है और क्या इन पर कोई स्क्रैच तो नहिं है या फिर इन्हें बदला तो नहीं।

कार एकदम नई खरीदी थी या सेकेंड हैंड, क्या आपके पास कार की सर्विस रेकॉर्ड हैं या नहीं और ये कार क्यों बेचना चाहते हैं इत्यादि।

आपके सवालों के जवाब में कार का मालिक भले ही सही जानकारियां न दे, मगर जब आप कार देखने जाएंगे, तो आपको पता चल जाएगा कि वह सच बोल रहा था या झूठ।

कार को जांचे परखें
कार को जब देखने जायें तो अपने साथ एक मैकेनिक को अवश्य लेकर जाएं, कार को अंदर और बाहर दोनों तरफ से अच्छे से चेक करना होगा। कार के सभी पार्ट्स जैसे कि कार की बॉडी, पेंटिंग, इंजन, दरवाजे, डिग्गी, हुड, लाइट, शीशे इत्यादि को बारीकी से जॉच लें।

कार की बॉडी लाइन, फ्लोरिंग, जंग, ऑयल लीकेज, टायर की हालत, डोर बॉर्डर और डिग्गी बॉर्डर वगैरह की भी जांच कर लेनी चाहिए। सस्पेंशन की हालत, व्हील अलाइनमेंट और इंजन की आवाज भी चेक कर लेनी चाहिए।

टेस्ट ड्राइव
किसी भी गाड़ी की सही कंडीशन उसे चलाए बिना नहीं मिल सकती। इसलिए कार चलाकर उसका पिकअप, गियर शिफ्टिंग, एक्सिलेरेटर आदि से जुड़ी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।

कोशिश करें कि टेस्ट ड्राइव लंबी लें, इससे कार परखने के लिए आपको अधिक समय मिलेगा।

पेपर वर्क
कोई भी सेकेंड हैंड या पुरानी कार खरीदने के लिए पेपर वर्क सबसे जरुरी और महत्वपूर्ण कार्य है। इसमें आपको आर सी बुक, सर्विस हिस्ट्री, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस आदि की जांच करना आवश्यक है।

नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
पता करलें कि जिससे आप कार खरीद रहे हैं उसने कार लोन पर तो नहिं खरीदी। अगर उसने बैंक से लोन लेकर कार खरीदी थी, तो आपको उस व्यक्ति से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' लेना जरूरी है। यह सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण होगा कि उसने लोन की सारी रकम चुका दी है।

सर्विस हिस्ट्री
कार ओनर से यूजर मैनुअल लेकर देखें जिससे पता चल जाएगा कि कार की सर्विसिंग और मेंटेनेंस कब-कब हुई है और यह भी कि कभी कोई बड़ी खराबी तो नहीं रही है।

सर्विस हिस्ट्री से यह भी पता चल जाएगा कि इंजन ऑयल सही समय पर बदलवाया जा रहा है या नहीं। कार की हुड खोलकर यह भी चेक कर लें कि किसी तरह की कोई लीकेज तो नहीं है।

आर सी की जांच
बोनट के नीचे गाड़ी की मैन्युफैक्चर डेट लिखी होती है, इसे भी देख लें। साथ ही रजिस्ट्रेशन कम टैक्स सर्टिफिकेट (आरसीटीसी) पर लिखी मैन्युफैक्चर डेट से इसका मिलान भी कर लें।

इंश्योरेंस
देख लें कि जो कार आपको बेची जा रही है, उसका इंश्योरेंस कराया गया है या नहीं और प्रीमियम सही समय पर भरा गया है या नहीं। इंश्योरेंस पेपर आपके नाम से ट्रांसफर हो जाए, यह भी सुनिश्चित करा लें।

देख लें कि कार बेचने की तारीख तक उस कार के मालिक की ओर से रोड टैक्स चुका दिया गया है या नहीं। आप कार की ओरिजिनल इनवॉयस की भी मांग सकते हैं।


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