शोरूम से गाड़ी खरीदते समय रहें सावधान, हो सकता है ऐसा फ्रॉड
दिल्ली से सटे गुड़गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर शोरूम से गाड़ी बुक करवाते हुए आप एक बार जरूर सोचेंगे। गुड़गांव के सेक्टर 18 में स्थित एक कार शोरूम के दो पुर्व कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी और चिटिंग के तरह केस दर्ज कर लिया है। केस दर्ज करवाने वाले के अनुसार कार खरीदते समय उससे रजिस्ट्रेशन के लिए 1.09 लाख रुपए अतिरिक्त लिये और इस पर भी उन्हें गलत रजिस्ट्रेशन नंबर दिया गया है।

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक बाजघेरा निवासी हरओम ने 23 दिसंबर 2016 को शोरूम से स्कॉर्पियो कार बुक थी और 3 जनवरी 2017 को उन्हें कार सौंप दी गई। इस दौरान कार के लिए उन्होंने 11.05 लाख और रजिस्ट्रेशन के लिए 1.09 लाख रुपए जमा किये। इसके बाद कई दफा शोरूम के चक्कर लगाने के बाद उन्हें HR26-DC7485 रजिस्ट्रेशन नंबर दे दिया गया।

मामले में मोड़ तब आया जब फरवरी 2018 में पंजाबी बाग इलाके से उनकी स्कॉर्पियो चोरी हो गई। चोरी होने के बाद वो पुलिस में कंप्लेन दर्ज कराने गए तो पुलिस वालों ने उनके गाड़ी के कागजात मांगे। हरिओम के पास कागजात की फोटोकॉप या डुप्लीकेट नहीं थी तो उसके लिए उन्हें आरटीओ जाना पड़ा। जब वे आरटीओ गए तो उन्हें पता चला कि उन्हें मिला रजिस्ट्रेशन नंबर HR26-DC7485 किसी टू-व्हीलर के नाम दर्ज है।

इसके बाद हरिओम ने शोरूम से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि आरोपित मैनेजर और सेल्स मैनेजर वहां से नौकरी छोड़ चुके हैं और रजिस्ट्रेशन से जुड़े उनका कोई दस्तावेज उनके पास नहीं है।

शोरूम से भी कोई सकारात्मक रिस्पॉंस न मिलने के बाद हरिओम ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस से 21 अगस्त को शिकायत की और FIR दर्ज करवाई। दोनों पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 406 (जालसाजी) और धारा 420 (धोखाधड़ी) का केस दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलास जारी है। जहां से हरिओम ने कार खरीदी थी उसके शोरूम ने बयान में कहा कि दोनों कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं और फिलहाल कंपनी का उनसे कोई संपर्क नहीं है।

हरिओम के साथ हुई ये घटना ऐसी पहली कोई घटना नहीं है जब किसी शोरूम द्वारा किसी को ठगा गया है। ऐसी घटनाएं लगातार आती रही हैं। दरअसल इसमें कंपनी को पुरी तरह से दोश देना गलत होगा, क्योंकि वो काफी मेहनत और ईमानदारी से अपना नाम बनाती हैं और ग्राहकों को बेहतर सर्विस और सुविधा देने का प्रयास करती हैं। लेकिन कुछ डीलरशीप वाले ऐसे होते हैं जो उनका नाम खराब करते हैं। असल में डीलरशीप को भी पुरी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि कुछ व्यक्तिगत लोग होते हैं जो इस तरह का काम करते हैं लेकिन कई बार इसमें टॉप लेवल के लोग भी शामिल पाए गए हैं। इससे लिए आपसे भी हिदायत है कि कार या बाइक खरीदते समय हर तरह की जांच पड़ताल करलें और सभी दस्तावेंजों को क्रॉस चेक करना तो बिल्कुल न भूलें।


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