वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) को लेकर मर्सिडीज ने जाहिर की नाराजगी
जर्मन कार निर्माता कंपनी मर्सिडीज बेंज इंडिया ने करों एवं नियमों में लगातार बदलाव पर अप्रसन्नता जाहिर की है। आइए इस खबर के बारे में विस्तार से जानते हैं।
जर्मन कार निर्माता कंपनी मर्सिडीज बेंज इंडिया ने करों एवं नियमों में लगातार बदलाव पर अप्रसन्नता जाहिर किया है। कम्पनी ने कहा है कि अगर वाहन उद्योग के लिए कर प्रणाली स्थिर और उत्साहवर्धक हो तो वह आसानी से उत्पादन दो गुना कर रोजगार के अवसर बढ़ा सकती है।

हालांकि देखा जाए तो कंपनी ने इस साल के पहले नौ महीनों के दौरान प्रतिकूल माहौल के बाद भी बिक्री में 20 प्रतिशत का इजाफा हासिल किया है। वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) से पहले तथा इसके बाद शुरुआत में कर की दर 43 प्रतिशत के स्तर तक आ जाने के कारण बिक्री को समर्थन मिला और कंपनी इस दौरान 11,869 इकाई बेचने में सफल रही।
हालांकि बाद में जीएसटी परिषद ने सितंबर में उपकर बढ़ाकर कुल प्रभावी कर 50 प्रतिशत कर दिया। इस बारे में कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी रोलैंड फोल्गर ने कहा, इस देश में कर प्रणाली में व्यापक बदलाव की जरूरत है। मुझे यह समझ नहीं आता है कि लग्जरी कारों पर इस तरह का उपकर क्यों है।

उन्होंने आगे कहा, यदि सरकार कर की दर को कम न भी करके कर प्रणाली को तर्कसंगत बनाये और इसमें निश्चितता लाए तो हम आसानी से महज दो साल के भीतर अपना उत्पादन दोगुना कर सकते हैं तथा रोजगार के अवसर भी बढ़ा सकते हैं।
फोल्गर ने देश की कर प्रणाली और नियामक व्यवस्था को बेहद जटिल और अगंभीर बताते हुए कहा, यहां नियमों एवं नीतियों के साथ ही कर प्रणाली पर अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार को कर व्यवस्था की अपनी सोच में बदलाव लाना होगा।
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कई वाहन निर्माताओं ने पहले उपकर लगाए जाने पर नाराडगी व्यक्ति की है और सरकार पर उनके हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है। अभी पिछले ही दिनों में कई वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम की गई हैं। लेकिन ऑटोमोबाइल पर दर बरकरार रखा गया है। पिछले दिनों ट्रैक्टर को भी कॉमर्शियल वाहन की श्रेणी में लाए जाने का मुद्दा भी देश में गरमाया हुआ है।


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