आखिर क्या था संजय गांधी और मारूति सुजुकी का संबंध? आइए जानते हैं...

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कुछ ब्रांड के नाम ऐसे होते हैं जिनका नाम लेते ही हमारे दिमाग में वह चीज उभर आती है। ऐसे में अगर वाहन उद्योग की बात करें तो शायद ही ऐसा कोई भारतीय नहीं होगा जिसके दिमाग में मारूति सुजुकी का नाम न उभरता हो।

आखिर क्या था संजय गांधी और मारूति सुजुकी का गहरा संबंध? आइए जानते हैं...

लेकिन अब आप यहां पर जरूर सोच रहे होंगे कि आखिर मारूति सुजुकी और संजय गांधी के संदर्भ में हम ऐसी बात क्यों कर रहे हैं तो थोड़ा धैर्य धरिए क्योंकि आज हम आपको एक ऐसी बात बताने जा रहे हैं कि जिसे सुनकर आपको आश्चर्य होगा। हालांकि इसके बारे में जानने के पहले थोड़ा सा मारूति सुजुकी के बारे में जान लेते हैं।

आखिर क्या था संजय गांधी और मारूति सुजुकी का गहरा संबंध? आइए जानते हैं...

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड सामान्यत: मारुति और इसके पूर्व में मारुति उद्योग लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। यह संगठन भारत में मोटर निर्माता है। यह जापानी मोटरगाडी एवं मोटरसाईकिल निर्माता सुजुकी की एक सहायक कंपनी है।

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आकड़ो की मानें तो इस वक्त भारतीय यात्री कार बाज़ार में इस कंपनी की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत है। यानि अगर भारत में 100 कारें बिकती हैं तो उमें से 37 कारें मारूति सुजुकी की कारें होती हैं। आज मारूति सुजुकी प्रवेश स्तर ऑल्टो से हैचबैक रिट्ज़ से लेकर स्विफ्ट, वैगन आर, ज़ेन और सेडान वर्ग में डिज़ायर,ईको, ओम्नी आदि बेचा करती है।

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यही नहीं इस कम्पनी की स्पोर्टस यूटिलिटी वाहन ग्रांड विटारा के लिये मारुति सुजुकी देश भर में प्रसिध्द है। कंपनी का मुख्यालय नेलसन मंडेला रोड, नई दिल्ली में स्थित है और इसका प्रोडक्शन गुड़गांव और मानेसर में होता है। मानेसर और गुड़गाव की सुविधाएँ सालाना 14 50000 ईकाइयों के उत्पादन करने की क्षमता रखती है।

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उपलब्ध जानकारी के अनुसार मारूति सुजुकी में भारत वित्त संस्थानों की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि बाकी हिस्सेदारी जापान की कम्पनी सुजुकी के हाथों में है। अब सरकार इसका संचालन भी नहीं करती है। मारूति सुजुकी साल 2007 में ही सरकार के नियंत्रण से मुक्त हो गई है।

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खैर। अब आते हैं संजय गांधी पर तो शायद आपको सबको उनका परिचय देने की जरूरत नहीं है लेकिन आपको इतना बता दें कि जब साल 1971 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक ऐसी ‘गाड़ी' के निर्माण का प्रस्ताव दिया, जिसे आम आदमी खरीद सके।

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तो जून 1971 में ‘मारूति मोटर्स लिमिटेड' नाम से एक कंपनी बनाई गई और इसके प्रबंधक निदेशक संजय गांधी ही थे। बिना किसा तजुर्बे, नेटवर्क और डिजाइन के ही संजय को इस परियोजना का लाइसेंस मिल गया।

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हालांकि कंपनी ने कभी भी कोई गाड़ी का मॉडल पेश ही नहीं किया, किन्तु 1971 के युद्ध ने विरोध की आवाजों को दबा दिया। हालांकि संजय ने जर्मन कंपनी फोक्सवैगन से भी करार किया, मगर आपातकाल ने इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

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इसके बाद ‘जनता परिवार' की जब सरकार बनी तो सरकारी दबावों और प्रयासों के चलते मारुति-सुजुकी ने पहली ‘जनता की गाड़ी' मारुति-800 पेश की। इसके बाद साल 1981 में संजय गांधी की मृत्यु के लगभग एक वर्ष बाद भारतीय केंद्र सरकार ने मारुति लिमिटेड को क्षति से बचाने हेतु मारुति उद्योग लिमिटेड का सहयोग लिया जिसकी स्थापना उसी वर्ष हुई।

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1982 में मारुति उद्योग लिमिटेड और जापान की सुजुकी के बीच एक लाइसेंस और संयुक्त उद्यम समझौते (JVA) हस्ताक्षर किए गए। सबसे पहले मारुति सुजुकी मुख्य रूप से कारों का आयात करती थी। मारुति ने पहले दो साल में लगभग 40,000 संपूर्ण रूप से निर्मित सुजुकी कारों का भारत में आयात किया।

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यह स्थिति काफी स्थानीय निर्माताओं के लिये परेशानी की बात थी और इस पर बेहतरीन कार्य किया गया और फिर बाद में साल 1983 में भारतीय बाजार में मारुति 800 को लाया गया जो कि भारत की सबसे पहले किफायती कार थी।

DriveSpark की राय

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हालांकि इस स्टोरी को लेकर किसी राय की जरूरत नहीं है लेकिन भारतीय कम्पीन मारूति सुजुकी ने किन परिस्थितियों से जुझते हुए नम्बर 1 बनने तक का सफऱ तय किया यह प्रत्येक भारतीयों के लिए जानना जरूरी था और इसलिए हमने आपको यह स्टोरी बताई।

English summary
Many people know that Sanjay Gandhi was the first managing director of Maruti Suzuki Company. But this connection is also bigger than that. Let's know about the same today.
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