इलेक्ट्रिक कारों के लिए बैटरी लागत में कटौती की है आवश्यकता
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी की लागत में कटौती की बात कही है। आइए इस खबर के बारे में विस्तार से जानते हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी की लागत में कटौती की आवश्यकता है। यह बात नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहते हुए जोर दिया कि इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी की लागत को कम करने के लिए एक तकनीकी सफलता हासिल करने की आवश्यकता है।

आठवें वैश्विक उद्यमिता शिखर सम्मेलन -2017 में गेस्ट के तौर पर आए नीति आयोग के सीईओ कांत ने कहा कि सभी बातों के बावजूद, वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल संख्या केवल एक प्रतिशत है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्सर्जन की मात्रा अब भी कितने बड़े स्तर पर है।

उन्होंने कहा कि एक बार जब बैटरी की कीमत गिरती है, तो इलेक्ट्रिक कार की कीमत आंतरिक दहन कार के बराबर होगी। इसलिए चुनौती बैटरी (प्रौद्योगिकी) में सफल बनाने में निहित है। कार बैटरी चार्जिंग सेवा में एकाधिकार नहीं होना चाहिए, और इसके लिए, इंटर-ऑपरेटिव चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं।

भारत ने कार निर्माताओं के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत किया गय़ा है क्योंकि देश में विकसित देशों की तुलना में प्रति व्यक्ति कार मालिकाना बहुत कम है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पर्याप्त बिजली पैदा करने की क्षमता है क्योंकि देश सौर ऊर्जा की ओर बढ़ना है।
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हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत अभी भी ड्राइवरहीन कारों के लिए तैयार नहीं है। नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि मैं शेयरिंग कारों का समर्थक हूं मेरी रूचि कार चलाने में नहीं है। नौकरियों की प्रकृति बदल रही है, इसलिए कार्य प्रकृति का बदलाव भी भविष्य में हो सकता है।

DriveSpark की राय
भारत सरकार साल 2030 तक भारत से डीजल और पेट्रोल वाहनों को खत्म कर देना चाहती है और नीति आयोग के सीईओ ने उसी योजना को आगे बढ़ाने की दिशा में अपनी यह राय रखनी है। पिछले कई दिनों से नीति आयोग भी इलेक्ट्रकि वाहनों की दिशा में कार्य कर रही है।


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