मर्सिडीज ने भारत की प्रमुख ई-क्लास मॉडल की बिक्री को किया रद्द, जानिए क्यों?
मर्सिडीज ने भारत की प्रमुख ई-क्लास मॉडल की बिक्री को जर्मनी में रद्द कर दिया है। आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि कम्पनी ने यह कदम आखिर क्यों उठाया।
मर्सिडीज-बेंज ने ई 350 डी की बिक्री जर्मनी में बंद कर दी है क्योंकि कम्पनी इस कार को एक बार फिर नए सिरे से अपडेट कर रही है और कार के गैस प्रणाली का इलाज कर रही है।
यूके से आई एक रिपोर्ट के मुताबिक ई 350 डी के 3.0-लीटर ड्यूल टर्बोचार्ज्ड वी 6 इंजन का निकास प्रबंधन प्रणाली फिर से इंजीनियर हो रही है।

रिपोर्ट बता रही है कि कम्पनी अपनी इस लक्जरी सेडान का उपचार कर इसके नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) उत्सर्जन को कम कर सकता है। ताकि यह ज्यादा प्रदुषण को न उगल सके।
एक स्रोत के मुताबिक मर्सिडीज ई एस 350 डी के लिए एक बड़ा एससीआर कैटेलिस्ट किया जाएगा।

इस कैटेलिस्ट से कार के नोक्स उत्सर्जन के स्तर में कटौती की जा सकेगी। इसका एक सेलेक्टिव कैटेलिक (एससीआर) नाइट्रोजन गैस को पानी में नाइट्रोजन आक्साइड को बदलने में मदद करता है।

बड़ा एससीआर कैटेलिक मर्सिडीज द्वारा उपयोग किए गए एडब्लू रिजोल्यूशन के परमाणुकरण के लिए एक बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करता है जो ई 350 डी के एनओसीएक्स उत्सर्जन को बेअसर करने की क्षमता को बढ़ाता है।

मर्सिडीज ने सिस्टम को और अधिक कुशलतापूर्वक चलाने की अनुमति देने के लिए AdBlue समाधान की इंजेक्शन प्रक्रिया में बदलाव भी किए हैं। हालांकि, मर्सिडीज फिर से इंजीनियर ई 350 डी के लिए एक बड़ा एडब्लू समाधान टैंक फिटिंग नहीं कर रहा है।

इसके पीछे बताया जा रहा है कि पुनर्निर्मित सिस्टम पहले की तरह प्रत्येक इंजेक्शन में कम करने वाले रिजोल्यूशन की समान मात्रा का उपयोग करता है। मर्सिडीज ई 350 डी 24.5 लीटर एडब्लू समाधान टैंक से सुसज्जित है।

DriveSpark की राय
ई 350 डी की बिक्री को बंद करने भले कम्पनी की कोई दूसरी योजना हो लेकिन नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन के स्तर में गिरावट करने का कार्य करना एक स्वागत योग्य कदम है। अब यह संसोधित मॉडल भारत आ पाएगा, फिलहाल इसकी कोई खबर नहीं है।


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