इलेक्ट्रिक कारों को लेकर टाटा मोटर्स की बोली से फूले महिंद्रा के हाथ-पॉव

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जैसा कि सभी जानते हैं कि इस वक्त भारत में इलेक्ट्रिक कारों का इकलौता निर्माता महिन्द्रा एंड महिन्द्रा है। ऐसे में हाल ही में देश में उन इलेक्ट्रिक वेहिकल्स (ईवी) की सरकार को की जाने वाली सप्लाई पर टाटा मोटर्स द्वारा की ओर से लगाई गई बोली पर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमएंडएम) ने हैरानी जताई है।

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इस बारे में महिंद्रा के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गोयनका ने कहा कि टाटा मोटर्स ने जिस कीमत पर टेंडर हासिल किया है, वह हमारे गले नहीं उतर रहा।' उन्होंने यह भी माना कि महिंद्रा की तुलना में टाटा मोटर्स ने बहुत कम बोली लगाई है।

इलेक्ट्रिक कारों को लेकर टाटा मोटर्स की बोली से फूले महिंद्रा के हाथ-पॉव

आपको बता दें कि टाटा मोटर्स ने प्रति गाड़ी 11.2 लाख रुपये की कीमत पर टेंडर हासिल किया। इसमें जीएसटी और पांच साल की वारंटी भी शामिल है। महिंद्रा ने इस टेंडर के लिए प्रति गाड़ी 13 लाख रुपये से अधिक की बोली लगाई थी।

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उसके बाद ऑर्डर का एक हिस्सा हासिल करने के लिए वह टाटा मोटर्स की कीमत की बराबरी करने को मान गई। केंद्र ने 10,000 गाड़ियों के लिए यह टेंडर दिया था। इसका पहला पार्ट 500 गाड़ियों के लिए है। इसका 30 पर्सेंट हिस्सा यानी 150 गाड़ियां महिंद्रा, टाटा मोटर्स की लगाई गई बोली पर सरकार को सप्लाइ करने के लिए राजी हुई है।

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कंपनी चाहे तो टाटा मोटर्स की कीमत पर वह 9,500 बची हुई गाड़ियों में से 40 पर्सेंट की सप्लाई कर सकती है। हालांकि, इस पर महिंद्रा को कोई मुनाफा नहीं होगा। गोयनका ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि टाटा मोटर्स ने किस आधार पर 11.2 लाख रुपये की बोली लगाई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसकी कई वजहें हो सकती हैं।

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उन्होंने बताया, 'हमारी गाड़ी बड़ी है। सरकार ने जो स्पेशिफिकेशंस तय किए थे, हम उससे ज्यादा चीजें ऑफर कर रहे हैं।' महिंद्रा ई20 हैचबैक और ई-वेरिटो सेडान नाम से दो इलेक्ट्रिक कारें बनाती है। गोयनका ने कहा कि ई-वेरिटो 20.5 kWh बैटरी के साथ आती है और उन्हें टाटा मोटर्स के प्रॉडक्ट में बैटरी साइज की जानकारी नहीं है।

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उन्होंने कहा कि बैटरी साइज की वजह से शायद टाटा मोटर्स की बोली कम रही हो। उन्होंने बताया कि ई-वेरिटो को एक बार चार्ज करने के बाद टेंडर की रेंज से 30-40 किलोमीटर अधिक चलाया जा सकता है। टेंडर में एक चार्ज में 130 किलोमीटर की शर्त रखी गई थी।

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गोयनका ने कहा कि इससे भी टाटा मोटर्स की बोली कम रही होगी। उन्होंने बताया कि महिंद्रा पांच साल से इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए पार्ट्स खरीद रही है। अगर टाटा मोटर्स ने अपने सप्लायर्स से बड़े ऑर्डर के लिए एग्रेसिव डील नहीं की होगी, तो कॉस्ट रिकवर करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, बोली पर टाटा मोटर्स ने कमेंट करने से मना कर दिया।

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कंपनी ने कहा कि 10,000 इलेक्ट्रिक कारों के टेंडर से कंपनी को ई-मोबिलिटी सेगमेंट में छलांग लगाने का मौका मिला है। उसने कहा कि वह भारतीय ग्राहकों को इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की फुल रेंज ऑफर करना चाहती है और इस ऑर्डर से उसे इसमें मदद मिलेगी।

DriveSpark की राय

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दरअसल इस कम बोली के साथ टाटा मोटर्स इस सेक्टर में एक बार जुआ खेलना चाहता है। यह कम्पनी का बिजनेस स्ट्रैटजी है। अगर एक बार इलेक्ट्रिक वाहनो में टाटा मोटर्स की पैठ बन गई तो उसे फिर आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

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आपको बता दें कि टाटा मोटर्स ने अपने हैचबैक का इलेक्ट्रिक संस्करण, ब्रिटेन में टिआगो का अनावरण किया था। यह कांसेप्ट टाटा मोटर्स यूरोपीय तकनीकी केंद्र (टीएमईटीसी) द्वारा विकसित की गई थी।

English summary
Currently Mahindra & Mahindra, the only manufacturer of electric cars in India. In this case, Mahindra & Mahindra (M & M) has expressed surprise at the recent bid by Tata Motors on the supply to the government of those electric vehicles (EV) in the country.
Story first published: Monday, October 9, 2017, 12:05 [IST]
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