फॉक्सवैगन डीजलगेट के बाद अब इस स्कैंडल से ऑटो वर्ल्ड में मची सनसनी
फॉक्सवैगन डीजलगेट कांड के बाद अब एक नया कांड सामने आया है। जो कि टोयोटा और निसान से संबंधित हैं। आइए इस खबर के बारे में विस्तार से जानते हैं।
अभी हाल ही में फॉक्सवैगन डीजलगेट कांड पर फैसला आया है जिसमें एक इंजीनियर को सजा हुई है। लेकिन इस सजा से पहले फॉक्सवैगन के साथ-साथ ऑटो जगत की जो फजीहत हुई। वह काफी चर्चित मुद्दा रहा है।

जहां अभी यह मुद्दा खतम भी नहीं हुआ था कि एक और इसी तरह के मुद्दे से सनसनी मच गई है और यह मामला किसी छोड़ी कम्पनी नहीं बल्कि टोयोटा और निसान जैसी बड़ी कम्पनियों से जुड़ा है। ताजा मामले के कारण अब टोयोटा और निसान जैसी बड़ी कार कंपनियों पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

खबरों के मुताबिक जापान ही की कंपनी Kobe Steel पर इन दोनों कंपनियों को खराब धातु सप्लाई करने के आरोप लगे हैं। एक ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कोबे स्टील ने निसान और टोयोटा की कारों में इस्तेमाल होने वाले जिस एल्यूमीनियम और कॉपर प्रोडक्ट की सप्लाई की है उसकी मजबूती और टिकाऊपन के बारे में गलत डेटा पेश किया।

जहां अब दोनों जापानी ऑटोकम्पनियां यह पता लगाने में जुट गई है कि इससे कार की सेफ्टी पर कितना फर्क पड़ा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह समस्या केवल यहीं आकर खत्म नहीं हो जाती है। बताया जा रहा है कि खराब धातु का इस्तेमाल एयरक्राफ्ट और स्पेस रॉकेट में भी किया गया है।

लिहाजा कार के मुकाबले एयरक्राफ्ट में खराब धातु के इस्तेमाल के कारण भीषण परिणाम सामने आ सकते हैं। इस ऑनलाइन रिपोर्ट्स के माध्यम से कोबे स्टील ने खुद यह बात स्वीकार की है कि सितंबर 2016 से अगस्त 2017 के बीच एल्यूमीनियम और कॉपर को गलत जानकारी वाले लेबल के साथ बेचा गया।

रिपोर्ट ने कहा है कि ऐसा ग्राहकों की बढ़ती मांग और सप्लाई को पूरा करने के लिए किया गया था। माना जा रहा है कि इस धातु का इस्तेमाल टोयोटा की कारों के बोनट, पिछले दरवाजों और अन्य जगहों पर किया गया। हालांकि ऐसे धातु वाली कारों का निर्माण अभी सिर्फ जापानी फैक्ट्री में ही हुआ था।

DriveSpark की राय
आपको बता दें कि अभी दुनियाभर का ऑटोमोबाइल सेक्टर मुसीबत के दौर से गुजर रहा है। जर्मन ऑटोमेकर कंपनी Volkswagen के उत्सर्जन घोटाले और Takata एयरबैग्स में खामी वाले मामले से ऑटो जगत की काफी किरकिरी हुई है।

फॉक्सवैगन ने तो वैश्विक स्तर पर अपनी गलती में सुधार के लिए 3 मिलियन कारों को रिकॉल किया लेकिन कई ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह संख्य़ा इससे भी ज्यादा है। अब अगर यह नया आरोप वास्तव में सच साबित होता है तो ऑटो जगत के सामने उसकी विश्वसनियता सबसे बड़ा सवाल होगी।


Click it and Unblock the Notifications