शुरू हो चुका है पेट्रोल और डीजल कारों की समाप्ति का दौर!
क्या यह पेट्रोल और डीजल कारों की समाप्ति की शुरुआत है? वर्तमान परिदृश्य को देखकर यह अभी नानमुमकिन लगता है, लेकिन कैसी संभावनाएं बन रही हैं। आइए इस लेख में इस खबर के बारे में विस्तार से जाना जाए।
आंतरिक दहन इंजन या तो पेट्रोल या डीजल द्वारा संचालित होते हैं और ये इंजन दशकों से भी मोटर परिवहन पर हावी हैं। हालांकि अब इन इंजनों के प्रभुत्व को चुनौती मिलनी शुरू हो चुकी है और हो सकता है आने वाले भविष्य में पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री बंद हो जाए?

दरअसल फ्रांस ने पेरिस के जलवायु समझौते के तहत अपने लक्ष्यों को पूरा करने की महत्वाकांक्षी योजना के रूप में 2040 तक पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री को समाप्त करने की योजना बनाई है।

देश के नए पर्यावरण मंत्री निकोलस हलोट ने कहा कि हम 2040 तक पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री बंद की घोषणा कर रहे हैं। आपको बता दें कि आंतरिक दहन इंजनों को खत्म करने के लिए केवल फ्रांस ही एक महत्वाकांक्षी योजना वाला देश नहीं है, बल्कि अन्य देशों भी वायु की गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को पूरा करने के लगातार कार्य कर रहे हैं।

नीदरलैंड ने 2025 तक पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री रोकने की योजना की घोषणा की है, जर्मनी के कुछ संघीय राज्य 2030 की समयसीमा निर्धारित की है जबकि वापस घर, भारत 2030 तक पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है।

ब्रिटेन में भी, 2040 तक इन वाहनों को पूरी तरह से बंद करने को बेताब है। तो सवाल यह भी उठता है कि हमारे यहां इन वाहनों से निपटने के लिए क्या किया जा रहा है तो आपको हमने पहले भी कई बार बताया है कि भारत लगातार पर्यावरण के अनुकूल वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों पर कार्य कर रहा है या बड़े स्तर इस तरह की योजनाओं पर विचार कर रहा है।

ब्लूमबर्ग के एक शोध समूह के मुताबिक, 2040 तक बिजली के वाहनों की बिक्री 54 प्रतिशत हो जाएगी। ब्लूमबर्ग का कहना है कि इलेक्ट्रिक कारों की मांग में वृद्धि के कारण वैश्विक तेल की मांग दिन में 8 मीटर बैरल से कम हो जाएगी और बिजली की मांग बढ़ जाएगी। सभी नई कारों को चार्ज करने के लिए 5 प्रतिशत की खपत होगी।

टेस्ला को लगता है कि उसने इलेक्ट्रिक कारों को आगे बढ़ाने की क्रांति का नेतृत्व कर चुका है। हालांकि, इस मॉस-वॉल्यूम कार निर्माता ने पहले से ही अपने वाहनों पर इलेक्ट्रिक मोटर्स पेश करने की योजना बनाई है। वोल्वो ने हाल ही में कहा है कि 2019 तक, कंपनी केवल पूरी तरह बिजली या हाइब्रिड कार बनाएगी।

DriveSpark की राय
अब जबकि इंटरनल दहन इंजन से हमारी कारें संचालित हो रही हैं और उससे उत्पन्न होने वाले कारों के प्रदुषण के स्तर को हम भलीभांति जाने रहे हैं। ऐसे में चंडीगढ़, बंगलुरू में शुरू हुए इलेट्रिक बसों के परीक्षण का जहां स्वागत होना चाहिए वहीं गुड़गांव में शुरू होने जा रही इलेक्ट्रिक बसों के लिए हमें सरकार को धन्यवाद कहना चाहिए।

इसके अलावा सरकार के साथ मिलकर भारत में कई ऑटोमोबाइल कम्पनियां इलेक्ट्रिक वाहनों पर कार्य कर रही हैं और भारत से 2030 तक डीजल-पेट्रोल वाहनों से मुक्ति का लक्ष्य रखा गया है। अगर यहां वास्तव में योजना के मुताबिक कार्य हुआ और सभी ने अपनी ओर शत-प्रतिशत दिया तो वह दिन दूर नहीं जब वास्तव में देश-दुनिया से डीजल-पेट्रोल वाहनों का वर्चस्व खत्म हो जाएगा।


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