ई-रिक्शे पर केन्द्र सरकार का खुद साथ नहीं दे रहे भाजपा शासित राज्य

सरकार पब्लिक ट्रासपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए ई रिक्शा पर विचार कर रही है लेकिन उसे भाजपा शासित राज्यों से ही मदद नहीं मिल पा रही है। आइए इस खबर के बारे में विस्तार से जानते हैं।

By Deepak Pandey

देश के नगरों और महानगरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में ई-रिक्शा को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की प्लानिंग कर रही है लेकिन इस बात का दूसरा पहलू यह है कि इस मुद्दे सरकार को भाजपा शासित राज्यों से ही कोई सहयोग नहीं मिल पा रहा है।

ई रिक्शे पर केन्द्र सरकार का खुद साथ नहीं दे रहे भाजपा शासित राज्य

हिंदी समाचार पत्र नवभारत में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक इस नीति को लेकर जिन राज्यों से केन्द्र सरकार को साथ नहीं मिल रहा है, उनमें कुछ तो बीजेपी शासित राज्य ही हैं, जबकि कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जिनमें एनडीए के सहयोगी दलों की सरकारें हैं।

ई रिक्शे पर केन्द्र सरकार का खुद साथ नहीं दे रहे भाजपा शासित राज्य

इस बारे में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ई-रिक्शा के मामले में प्रक्रिया को आसान न बनाने वाले राज्यों को कानूनी तौर पर किस तरह बाध्य किया जा सकता है इस पर विचार किया जाएगा।

मंत्रालय के सूत्रों ने इस बारे में बताया है कि देश भर में ई रिक्शा के रजिस्ट्रेशन और उनके ड्राइवरों को लेकर आने वाली दिक्कतों पर सोमवार को हुई बैठक में यह तथ्य सामने आया कि नौ राज्य ऐसे हैं, जिनमें स्थानीय ट्रांसपोर्ट विभागों की वजह से अब तक एक भी ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।

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हैरान करने वाली बात तो यह है कि इसमें खुद परिवहन मंत्री का गृह प्रदेश महाराष्ट्र भी है। महाराष्ट्र में सिर्फ नागपुर को छोड़ दें तो एक भी ई रिक्शा रजिस्टर नहीं हुआ। इसी तरह से बीजेपी शासित गोवा की भी यही हालत है।

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जम्मू कश्मीर, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, चंडीगढ़ और कर्नाटक में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। जिसपर गड़करी का कहना है कि वे जल्द ही ई रिक्शा पर लगने वाले जीएसटी की दरों के मसले को हल कराने का प्रयास करेंगे। मंत्रालय की ई रिक्शा कमिटी के चेयरमैन अनुज शर्मा ने बैठक में जानकारी दी कि आरटीओ में इस तरह की व्यवस्था है कि ई रिक्शा का रजिस्ट्रेशन कराना ही मुश्किल होता है।

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इसी वजह से यूपी, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के शहरों में गैरकानूनी तरीके से ई रिक्शा चल रहे हैं। ऐसे रिक्शों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। राजधानी दिल्ली के भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। यहां रजिस्ट्रेशन तो 35 हजार ई-रिक्शा का हुआ है लेकिन सड़कों पर लगभग सवा लाख ई रिक्शा दौड़ रहे हैं।

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जबकि दूसरी ओर ई रिक्शा के रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ राज्यों ने भारी भरकम फीस रखी है जबकि कुछ जगह ई रिक्शा चलाने वालों को ड्राइविंग लाइसेंस लेने में भारी परेशानी हो रही है। ई रिक्शा भले ही पर्यावरण के अनुकूल हैं लेकिन इसके लिए सब्सिडी नहीं दी जाती है।

DriveSpark की राय

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इस बात में कोई शक नहीं कि ई रिक्शा स्थानीय ट्रांसपोर्ट के बेहतर साधन हैं और ये कम बजट में ही लोगों को गंतव्यतक पहुंचा दिया करते हैं। ई रिक्शा से पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता है लेकिन बिना रजिस्ट्रेशन के इनको सड़कों पर दौड़ाने का अर्थ मौत को दौड़ाना है।

सरकार ई-रिक्शे को लेकर कोई ठोस नीति बनाए और उसे लागू करे। यही सबसे बेहतर रास्ता है जिसपर सभी राज्यों को उसका साथ देना चाहिए।

Article Published On: Wednesday, November 1, 2017, 12:35 [IST]
English summary
The government is considering e-rickshaw to promote public transport but it is not getting help from the BJP-ruled states.
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